मल्टी कनेक्शन होने के बाद अगर सोसायटी में बिजली चोरी होती है तो उस नुकसान की वसूली वहां की आरडब्ल्यूए या अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) से होगी। इसके लिए बिजली कंपनी सोसायटी में एक रेफरेंशन मीटर लगाएगी। रेफरेंशन और फ्लैटों के मीटर की कुल यूनिट में अगर 4 प्रतिशत से अधिक का अंतर आया तो कॉमन सर्विसेज के बिजली बिल में धनराशि जोड़ी जाएगी।
एनपीसीएल के जीएम सारनाथ गांगुली ने बताया कि मल्टी कनेक्शन देने के नोटिफिकेशन में आयोग ने बिजली चोरी को रोकने के भी इंतजाम किए हैं। पुरानी सोसायटी में सिंगल प्वाइंट को मल्टी प्वाइंट में कंपनी प्रत्येक फ्लैट में अपना बिजली मीटर लगाएगी। कॉमन सर्विसेज का एक कनेक्शन वहां की एओए या बिल्डर के नाम पर दिया जाएगा। इन सभी के ऊपर एक रेफरेंशन मीटर लगाया जाएगा। इस मीटर से पता लगाया जाएगा कि सोसायटी में कुल कितनी बिजली की खपत हो रही है। इसका मिलान फ्लैटों के मीटर से खपत बिजली से किया जाएगा। अगर बिजली की खपत का नुकसान चार प्रतिशत से अधिक मिलता है तो उसका भुगतान बिल्डर या एओए को करना होगा।
ट्रांसफॉर्मर जला तो कंपनी नहीं बदलेगी
सोसायटी में बिजली सप्लाई करने के लिए ट्रांसफॉर्मर लगा होगा। अगर ट्रांसफॉर्मर जलता है तो उसे बदलने की जिम्मेदारी बिल्डर या एओए की होगी। एनपीसीएल ट्रांसफॉर्मर नहीं बदलेगा।
सामान्य से महंगा होगा यह कनेक्शन
फ्लैट खरीदारों पर दोहरी मार पड़ने वाली है। एक तरफ उनको विद्युतीकरण पर आने वाला खर्च देना होगा, वहीं दूसरी तरफ फिर से कनेक्शन लेना पड़ेगा। सोसायटी में दी जाने वाली कनेक्शन की दर सामान्य कनेक्शन की तुलना में ज्यादा होगी। ग्रेटर नोएडा में एनपीसीएल दो किलोवाट का बिजली कनेक्शन 4500 रुपये में देता है। जबकि, सोसायटियों में यह कनेक्शन महंगा होगा। सोसायटी में दो किलोवाट का कनेक्शन 6 हजार रुपये से अधिक का होगा। जबकि, थ्री फेज का कनेक्शन के लिए 12,000 रुपये से अधिक खर्च करने होंगे।