उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में कई परिवार बेघर हो गए। बहुत से लोगों का सब कुछ बर्बाद हो गया। उपद्रवियों ने जब हिंसा की तो घर जलाने में उनको न हिंदू दिखे न मुसलमान। जिसके घर और दुकान सामने पड़े सब कुछ फूंकते चले गए।
मुस्तफाबाद इलाके में ऐसे बहुत से लोग हैं जिसके सिर पर अब न छत बची है न खाने को एक वक्त का खाना। ऐसे में मुस्तफाबाद के लोगों ने धर्म की दीवार को तोड़कर सभी मजहब के प्रभावित लोगों के रहने के लिए ईदगाह में अस्थायी शरणार्थी कैंप की शुरुआत की है।
यहां 33 फुटा रोड पर मौजूद बड़ी ईदगाह की साफ-सफाई करवाकर वहां पर टेंट लगवाने का इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां करीब 15 हजार लोगों के रहने, खाने-पीने का इंतजाम किया जाएगा। इसके अलावा प्रशासन की मदद से हिंसा प्रभावित लोगों को उनके घरों में दोबारा बसाने का भी प्रयास किया जाएगा।
बृजपुरी रोड पर रहने वाले हाजी सलीम शाहिद बताते हैं कि हिंसा में अपना सब कुछ गंवाने वाले लोगों के पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं थी। ऐसे में इलाके के लोगों ने भागीरथी विहार, चमन पार्क और मुस्तफाबाद के कई मकानों में इन लोगों के रुकने का इंतजाम किया है।
यहां खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की गई है। वहीं तौहीद मलिक ने बताया कि हम लोगों ने धर्म देखकर लोगों की रक्षा नहीं की। जिसकी भी कॉल आई, उसको वहां से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अब इलाके के लोगों के साथ मिलकर 33 फुटा रोड पर ईदगाह में हिंसा प्रभावित लोगों के रहने का इंतजाम किया जा रहा है।
शुक्रवार देर रात या शनिवार सुबह तक यहां टेंट लगाकर लोगों के रहने का इंतजाम कर दिया जाएगा। तौहीद बताते हैं कि ईदगाह किसी एक धर्म विशेष के लिए ही नहीं है। जो भी हिंसा प्रभावित हैं वह यहां आकर शरण ले सकता है। पूरा इलाका उनकी रक्षा करने के अलावा उनके खाने-पीने की व्यवस्था करेगा।