ट्रेनी आईएएस अधिकारी आशीष दहिया की स्वीमिंग पूल में डूबकर मौत के मामले में परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका जताई है। परिजनों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर का तैराक आखिर कैसे 10 फुट गहरे पानी में डूब सकता है। आशीष ने अपने कॉलेज की ओर से तैराकी की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था।
आशीष किसी साजिश का शिकार हुआ है। पुलिस का कहना है कि पार्टी में मौजूद लोगों की लिस्ट बनाकर उनसे पूछताछ की जा रही है, जो महिला अधिकारी पूल में गिरी थी, उससे भी पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा संस्थान के सीसीवीटी फुटेज की भी छानबीन की जा रही है। हालांकि जिस जगह हादसा हुआ, वहां पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था।
बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में होशियार रहे आशीष ने बहुत मेहनत से यह मुकाम पाया था। आशीष के पिता नरेंद्र दहिया हरियाणा में कृषि विभाग से रिटायर हैं, मां मूर्ति देवी हरियाणा में ही शिक्षिका हैं। दोनों बड़े भाई सुरेंद्र व अशोक इंजीनियर हैं। अशोक विदेश में रहते हैं।
गोल्ड मेडल से नवाजे गए थे
- फोटो : अमर उजाला
चाचा विरेंद्र ने बताया कि बचपन से आशीष को आईएएस बनने की चाहत थी। हरियाणा औैर यूपी में सरकारी नौकरी करने के बाद 2013 में उसका सलेक्शन हिमाचल प्रदेश पुलिस सर्विसेज में हो गया।
लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी, दोबारा 2015 में वह आईआरएस चुना गया और हैदराबाद चला गया। अगले ही साल वह 2016 में आईएएस चुन लिया गया। मसूरी में आईएएस की ट्रेनिंग के दौरान उसे डायरेक्टर गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
एक जून को करना था श्रीनगर में ज्वाइन
परिजनों ने बताया कि एक साल चली ट्रेनिंग के बाद एक जून को आशीष को जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर ज्वाइन करना था। इसके लिए उसने सभी तैयारी भी कर ली थी। परिवार भी बेटे की पोस्टिंग के लिए काफी उत्साहित था।
31 मई को दिल्ली से ही आशीष की श्रीनगर के लिए फ्लाइट थी। लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था। अब आशीष की मौत से परिवार का रोते-रोते बुरा हाल है। आशीष की मौत की खबर के बाद से पत्नी व मां को होश नहीं था।
डॉक्टरों के पैनल से कराया गया पोस्टमार्टम
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दिल्ली पुलिस ने आशीष के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल से करवाया। पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों का कहना है कि आशीष के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। ऐसा लगता है कि पानी में डूबने के कारण ही उनकी मौत हुई है। डिटेल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।
स्वीमिंग पूल के पास नहीं थे गार्ड्स
परिजनों ने फॉरेन सर्विस संस्थान पर भी चूक के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि संस्थान के बीचो बीच गहरा स्वीमिंग पूल है। लेकिन हादसे के समय वहां लाइफ सेविंग गार्ड्स क्यों तैनात नहीं थे। अगर आशीष पानी में डूब भी रहा था तो उसे क्यों नहीं बचाया गया।
वहीं संस्थान के सुरक्षा गार्ड्स का कहना है कि सुबह 8.00 बजे से रात 10.00 बजे स्वीमिंग पूल खुला रहता है। लेकिन चूंकि संस्थान में आईएफएस व अन्य अधिकारी आते हैं तो वह किसी भी समय पूल का इस्तेमाल करते हैं, कोई उनको रोक नहीं पाता है। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ।