आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता जब पार्टी से राज्य सभा सांसद बनाए गए थे तब बड़ा हंगामा हुआ था। आप के कई लोग पार्टी से अलग हो गए थे। फिलहाल गुप्ता पार्टी में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। टिकट बंटवारे के बाद जिन विधायकों को फिर से मौका नहीं दिया गया, वे पैसों के बदले टिकट देने का आरोप लगा रहे हैं। कोषाध्यक्ष गुप्ता पार्टी के चुनाव खर्च को किस तरह मैनेज कर रहे हैं और असंतुष्टों के आरोपों का क्या जवाब दे रहे हैं। इस पर संतोष कुमार ने उनसे बातचीत की। पेश हैं कुछ अंश।
आपके सांसद बनते वक्त पार्टी में बड़ा विवाद हुआ था। अब सब ठीक होगा। दिल्ली के चुनाव भी आ गए।
पुरानी बातों पर चर्चा करने का कोई खास मतलब नहीं। फिलहाल हमारा फोकस दिल्ली चुनाव जीतने पर है और हम जीत रहे हैं।
तैयारियां क्या हैं।
पांच साल के काम की बदौलत पार्टी चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया था। जल्द ही वह लोगों को गारंटी कार्ड भी बांटेंगे। इससे लोग आश्वस्त होंगे कि पिछली सभी सुविधाएं जारी रहेंगी। वहीं, दिल्ली को वैश्विक राजधानी बनाने की रणनीति बताई जाएगी।
आप तो कोषाध्यक्ष भी हैं।
देखिए, पार्टी ने 2013 का विधानसभा चुनाव 20 करोड़ व 2015 का 25-30 करोड़ रुपये खर्च कर लड़ा था। इस बार अनुमान है, पिछली बार की तुलना में कम खर्च होगा। उम्मीद है पार्टी 22-25 करोड़ रुपये में चुनाव लड़ लेगी। पैसे की जगह आप सरकार अपने पांच साल के कामकाज के दम पर चुनाव लड़ रही है।
फंडिग के लिए क्या कर रहे हैं?
इतने भर का इंतजाम है। पार्टी को नियमित चंदा देने वाले रकम दे रहे हैं। पार्टी फंड रेजिंग समेत क्राउड फंडिग भी कर रही है। पैसे की कमी नहीं है।
टिकट कटने से नाराज कुछ विधायक तो मोटी रकम के लेन-देन का आरोप लगा रहे हैं?
नाराजगी में लोग कुछ भी बोल देते हैं। दो महीने पहले ही पार्टी ने उनको बता दिया था कि आपका प्रदर्शन खराब है। इसे ठीक कर लो। इसमें बीस विधायक थे। चार-पांच ने प्रदर्शन ठीक कर टिकट पा लिया। जो 15 नही सुधरे, उनकी वापसी नहीं सकी। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और जहां तक पैसे के लेन-देन का आरोप है, मैं पार्टी का कोषाध्यक्ष हूं। एक पैसा भी पार्टी ने लिया होता तो वह कोष में ही आता। लेकिन मैं एफिडेविट देकर कह सकता हूं कि पार्टी फंड में इस तरह का एक भी पैसा नहीं आया। सारे फंड का हिसाब-किताब है।
दिल्ली चुनाव को लेकर आप आश्वस्त हैं या हार का डर भी है?
मैं दूसरी बात कहता हूं। चार्टर्ड अकांटेंट होने के नाते मैं दावे से कहता हूं कि दिल्ली में सरकार से दिया गया एक रुपया लोगों तक पहुंचते-पहुंचते सवा रुपया हो जाता है।
इसका क्या मतलब हुआ?
दिल्ली सरकार ने बिजली बिल माफ किया और डोर स्टेप डिलिवरी दी। इसमें सरकार से मिली पूरी रकम तो लोगों को मिली ही, ऊपर से दफ्तरों को चक्कर लगाने में होने वाला 15 पैसा भी बच गया। आप इस तरह से देखेंगे तो समझ में आएगा कि दिल्ली चुनाव आप के लिए कितना आसान है।
लेकिन भाजपा तो कह रही है वह जीत रही है?
कहने को तो कोई कुछ भी कह सकता है। लेकिन दिल्ली चुनाव में लगे भाजपा के मंत्री तक निजी बातचीत में कहते हैं कि उनको बमुकिश्ल 15 सीट मिल रही है। जबकि अभी की हालत में हमारा अपना सर्वे बता रहा है कि आप पिछला प्रदर्शन दुहराने जा रही है।