आरोपी सामने हैं और अपराध भी साबित हो गया, फिर भी वे आज तक फांसी पर नहीं चढ़ सके। इसे आप क्या कहेंगे, क्या ये न्याय में अनावश्यक देरी नही हैं। तेलंगाना की महिला डॉक्टर भी हमारी निर्भया जैसी थी। उसके आरोपियों को सजा मिल गई है।
कुछ लोग हमारी सोच से इत्तेफाक नहीं रखेंगे, हम जानते हैं। निर्भया की मां ने कहा, हम एक सभ्य समाज में रहते हैं। सब यही तो उम्मीद करते हैं कि बहन बेटी बाहर गई है तो शाम तक सुरक्षित घर लौट आएगी। ध्यान रहे कि हम यहां सभ्य समाज पर भरोसे की बात कर रहे हैं। अचानक खबर आती है कि आपकी बेटी तो दरिंदों का शिकार हो गई।
तब दिमाग में सभ्य समाज की बात आती है कि अरे ये कैसे हो सकता है।सभ्य समाज की परिभाषा क्या है।आपकी किसी से कहासुनी नहीं है, इसके बावजूद आपकी बेटी को ऐसी दर्दनाक मौत मिलती है।
निर्भया के पिता, बोले, हम जानते हैं कि बहुत से लोग हमारी आलोचना भी करें कि हम तेलंगाना एनकाउंटर को ठीक क्यों बता रहे हैं। ये हम नहीं बोल रहे, बेटी की दर्द बोल रहा है। वह दर्द जो किसी दूसरे ने नहीं झेला है, उसे केवल निर्भया ने झेला था।
देश का कानून मजबूत है, कठोर है या लचीला है, आप जानें। एक मां बाप को तो अपनी बेटी का दर्द सहना है और उसके आरोपियों को जल्द से जल्द से मौत की राह पर पहुंचाना है। देरी क्यों हो रही है, इस बाबत निर्भया के मां बाप बोले, हम पहले ही इस मामले में बहुत बोल चुके हैं। हजारों बाइट दे चुके हैं कि न्याय में देरी क्यों हो रही है।