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आरोपी अंसल को कैसे जारी हुआ वीवीआईपी एफ टोकन, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Tue, 24 Sep 2019 02:11 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi high court - फोटो : PTI
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उपहार अग्निकांड मामले में अभियुक्त रहे सुशील अंसल को पासपोर्ट जारी करने के लिए एफ टोकन जारी किए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि कैसे कई लोगों की गैर इरादतन हत्या के अभियुक्त को यह टोकन जारी किया गया, जबकि यह टोकन केवल वीवीआईपी को जारी किया जाता है।

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सुशील अंसल को यह टोकन 22 जुलाई, 2018 को जारी किया गया था। मामले की सुनवाई 26 सितंबर को की जाएगी। न्यायमूर्ति नजमी वजिरी की टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि इस मुद्दे पर जांच की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह टोकन किसी खास परिस्थिति में वीवीआईपी को जारी किया जाता है। यह टोकन अंसल को कैसे जारी किया गया।

किसके कहने पर जारी किया गया, यह सब जांच का मुद्दा है। दिल्ली पुलिस ने 28 मई को बताया था कि उसने सुशील अंसल को पासपोर्ट जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। इसके तहत उसने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को नोटिस भेजकर सुशील अंसल को साल 2000 के बाद से जारी किए गए सभी पासपोर्ट का विवरण बताने को कहा है।

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क्या है पूरा मामला?

वर्ष 1997 के उपहार अग्निकांड में दोषी पाए गए सुशील अंसल ने अपने पासपोर्ट बनवाने में सजा का जिक्र नहीं किया था इसके बाद उसे पासपोर्ट जारी कर दिया गया था। इसे देखते हुए कोर्ट ने 17 दिसंबर को सुशील अंसल सहित उनके पासपोर्ट बनवाने में मदद करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने को कहा था।

दिल्ली पुलिस ने 13 मार्च को भी कोर्ट से कहा था कि उसने सुशील अंसल व अन्य तत्कालीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। एक पुलिसकर्मी से पूछताछ भी की गयी है। इससे पहले पुलिस ने 6 फरवरी को कोर्ट को बताया था कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले में अंसल के अलावा तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। 

उनमें से दो वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस मामले में पुलिसवालों पर आरोप है कि उन्होंने सुशील अंसल के खिलाफ आपराधिक मामले की जानकारी होने के बावजूद अपनी सत्यापन रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं किया था। इस वजह से सुशील अंशल को पासपोर्ट जारी कर दिया गया था। यह पासपोर्ट तत्काल योजना के तहत वर्ष 2013 में बनवाया गया था। 
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