कहीं शादी के बर्तन तो कहीं खाकर फेंके गए दोने-पत्तल। ये स्कूल है या बारातघर। सदपुरा गांव स्थित प्राइमरी स्कूल आने वालों के दिमाग में कुछ ऐसे ही सवाल उठते हैं। यहां आने वाले विद्यार्थियों को शादी के मौसम में अक्सर छुट्टी बताकर लौटा दिया जाता है। स्कूल की इंचार्ज पर दबाव होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पातीं। परेशान होकर गांव के ही कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की है।
बुधवार को अमर उजाला की टीम जब स्कूल पहुंची तो सुबह 9.30 बजे सामान्य दिनों की तरह कक्षाएं लगी थीं। यहां प्रांगण के एक कोने में जूठे बर्तन पड़े थे। टेंट के लिए लगी बल्लियों को भी नहीं हटाया गया था।
कक्षाओं के सामने दोने पत्तल और कूड़ा पड़ा था। शौचालय के आगे भी गंदगी से विद्यार्थी उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। नाम नहीं छापने पर एक अध्यापक ने बताया कि लोग आयोजन से पूर्व तो सफाई की बात कहते हैं मगर उसके बाद भूल जाते हैं।