उत्तर प्रदेश से रोजाना दिल्ली आने वाले लाखों यात्रियों को जल्द ही तीन प्रमुख बॉर्डरों पर जाम, अंधेरे और अव्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद है। यमुनापार को नोएडा और गाजियाबाद से जोड़ने वाले मयूर विहार (नोएडा बॉर्डर), अप्सरा बॉर्डर और लोनी बॉर्डर का कायाकल्प किया जाएगा। दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के तहत बॉर्डरों पर नए प्रवेश द्वार बनाने के साथ सड़क और फुटपाथ सुधारे जाएंगे, आधुनिक रोशनी लगाई जाएगी और हरियाली विकसित की जाएगी।
बॉर्डर दिल्ली में प्रवेश का प्रमुख रास्ता होने के बावजूद लंबे समय से यातायात दबाव और अव्यवस्थित ढांचे की समस्या से जूझ रहे हैं। खासकर प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क डिजाइन, पैदल यात्रियों के लिए जगह और यातायात संचालन की खामियों के कारण वाहनों का दबाव बढ़ता है। नई परियोजना में इन्हीं हिस्सों को प्राथमिकता देकर सिविल स्ट्रक्चर को नए सिरे से विकसित करने की योजना है।
आठ महीने में पूरा होगा काम
पूरी परियोजना को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में सिविल निर्माण के तहत तीनों बॉर्डरों पर प्रवेश द्वार, सड़क सुधार और फुटपाथ का निर्माण होगा। दूसरे चरण में इलेक्ट्रिकल और लाइटिंग का काम किया जाएगा। तीसरे हिस्से में हॉर्टिकल्चर और सौंदर्यीकरण के कार्य शामिल हैं। परियोजना को पूरा करने के लिए आठ महीने की समयसीमा तय की गई है। शुरुआती दो महीने डिजाइन और योजना तैयार करने में लगेंगे, जबकि अगले छह महीने निर्माण और विकास कार्यों के लिए निर्धारित हैं।
सड़कें नए सिरे से होंगी डिजाइन
बॉर्डर के आसपास यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए सड़कों और सिविल स्ट्रक्चर का री-डिजाइन किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रवेश और निकास मार्गों पर बनने वाले बॉटलनेक को कम करना है। इससे नोएडा, ट्रांस-हिंडन और गाजियाबाद से दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालकों को अधिक सुगम मार्ग मिलने की उम्मीद है। परियोजना के आकलन के अनुसार यात्रियों के 15 से 20 मिनट तक बचने की संभावना है।
रोशनी से सुरक्षा, हरियाली से बढ़ेगी खूबसूरती
लोनी और अप्सरा बॉर्डर पर रात के समय रोशनी की कमी को देखते हुए आधुनिक पोल लाइट, हाई-मास्ट और आर्किटेक्चरल लाइटिंग लगाई जाएगी। इससे रात में दृश्यता बेहतर होने के साथ राहगीरों और महिला यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी। सौंदर्यीकरण के तहत सड़क किनारे हरियाली और लॉन विकसित किए जाएंगे। पैदल यात्रियों के लिए बेहतर पेवमेंट, बैठने की बेंच और कूड़ेदान लगाए जाएंगे। बाहर से आने वाले वाहन चालकों को सही दिशा बताने के लिए संकेतक भी लगाए जाएंगे। इस तरह परियोजना का उद्देश्य केवल बॉर्डरों की शक्ल बदलना नहीं, बल्कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले यात्रियों के अनुभव और यातायात व्यवस्था दोनों को बेहतर करना है।