उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान दोनों ही समुदाय के 53 लोगों की मौत के बाद शाहीन में बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं ने होली न मनाने का फैसला किया है। यहां मौजूद महिलाओं व प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शोक का इजहार करने के लिए होली न मनाने का फैसला किया गया है।
हालांकि लोगों ने सोमवार शाम से ही एक-दूसरे को होली की बधाई देना शुरू कर दी। रविवार शाम को महिला दिवस के मौके पर शाहीन बाग में संगीत के कई कार्यक्रम भी हुए। होली के मौके पर सड़क खोलने की अटकलें चल रही थीं। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल बिना सीएए और एनआरसी को वापस लिये वह सड़क नहीं छोड़ेंगे।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद जैनुल आबदीन ने बताया कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के बाद अचानक शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी महिलाओं व लोगों की संख्या घट गई थी। कुछ लोगों ने सड़क खोलने के लिए दबाव भी बनाना शुरू कर दिया था। दोबारा सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया गया।
अब शाहीन बाग में लोगों की संख्या बढ़ गई है। वहां मौजूद महिला कुलसुम ने बताया कि हिंसा के बाद यहां प्रदर्शनकारी दुखी हैं। हिंसा में इंसानियत की हत्या कर दी गई। वह हिंसा का पूरी तरह विरोध करती है। इसलिए शाहीन बाग में होली न मनाने का फैसला किया गया है।