रात में मैंने कहा था कि बेटा खाना खा ले, उसने बोला मम्मी खा लूंगा। फिर पता ही नहीं चला कि कब गाड़ी की चाबी लेकर बाहर चला गया। अगर मुझे पता होता तो रोक लेती, जाने ही नहीं देती अपने लाल को, तो आज जिंदा होता घर का इकलौता चिराग। यह कहते हुए मृतक बिट्टू उर्फ हिमांशु की मां सावित्री रोने लगी।
नोएडा के सेक्टर-11 में हिमांशु की चार दोस्तों संग सड़क हादसे से मौत हो गई थी। हादसा रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि करीब दो बजे हुआ। सभी दिल्ली के न्यू कोंडली के थे। हादसे में चार घरों के चिराग बुझने से सोमवार को इलाके में मातम पसरा रहा।
सावित्री ने बताया कि वह मूलरूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। हिमांशु के पिता हरीश निजी कंपनी में कैब चलाते हैं। वह अपने पापा की गाड़ी बिना बताए रात में ले गया था। सावित्री ने बताया कि अभी कुछ समय पहले ही उनके बेटे की नौकरी लगी थी। घर में खुशी का माहौल था।
वहीं, 15 अक्तूबर को बेटे का जन्मदिन भी था। स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली थी। डिग्री आने का इंतजार था। बेटे के जाने से पूरा घर बर्बाद हो गया है। वहीं, पड़ोसी गौरव ने बताया कि हिमांशु उसका दोस्त नहीं बल्कि भाई था। उसके जाने से भाई को खो दिया है।
मनीष तो नहीं आया पर मौत की खबर आई : मृतक मनीष की मां सुलोचना देवी के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने कहा कि मनीष घर में सबसे छोटा था। बहुत लाडला बेटा था मेरा। घर से बताकर गया था कि मां दोस्त के जन्मदिन की पार्टी में जा रहा हूं। जल्द आ जाऊंगा, लेकिन वह तो नहीं आया। उसकी मौत की खबर आई।
उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से उत्तराखंड के देवप्रयाग के रहने वाले हैं। रविवार देर रात 2.30 बजे उन्हें फोन आया कि मनीष की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। वह नोएडा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने कहा कि घर में दो बहनें हैं। दोनों की शादी हो गई है। मनीष की बहन का कहना है कि वह कहीं भी जाता था, तो बताकर जाता था।
मोहित की मौत की खबर सुन पैरों तले खिसकी जमीन
रविवार देर रात 2 बजे कॉल आई कि तुम्हारे भाई मोहित ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। उसी समय मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। ऐसा लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। यह कहना है मृतक मोहित के छोटे भाई मनीष का। उसकी आंखों में आंसू साफ झलक रहे थे। उन्होंने बताया कि उसका भाई नौकरी की तलाश में था। वह मूलरूप से यूपी के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है। दोनों भाइयों को चाचा ने पाला है।
बचपन से थी दोस्ती, प्राइवेट जॉब करते थे
सड़क हादसे के शिकार हुए चारों युवक बचपन से ही दोस्त थे। सभी प्राइवेट जॉब करते थे। मोहित (21) 8वीं पास था और शेयर मार्केट में काम करता था। विशाल (24) 12वीं पास था और कॉलसेंटर में काम करता था। बीकॉम पास मनीष (24) कुछ दिन पहले तक प्राइवेट जॉब करता था। वहीं बिट्टू उर्फ हिमांशु (26) स्नातक था। घायल उत्तम दसवीं पास है।