रंग-बिरंगे पक्षी आपको लुभाते हैं तो दिल्ली चिड़ियाघर में उनके दीदार का बेहतरीन मौका है। यहां बने क्रत्रिम (आर्टिफिशियल) आइसलैंड में बेहद आकर्षक पेंटेड स्टॉर्क की बस्ती बसने लगी है।
मानसून के मौसम में हिमालय की वादियों से दिल्ली पहुंचने वाले ये मेहमान आजकल अपने घोंसले बनाने में जुटे हैं। इन घोंसलों में जल्द ही इनकी संतानें दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगी। इन पक्षियों की खूबसूरती देखने के लिए चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों की संख्या बढ़ गई है।
हर साल हिमालय के विभिन्न इलाकों से आने वाले इन पेंटेड स्टॉर्क के लिए चिड़ियाघर में क्रत्रिम आइसलैंड बनाया गया है। इसी पर इन्होंने बसेरा बनाया है। क्रत्रिम आइसलैंड के बीच में कीकर के पेड़ों का जंगल है। यह जंगल चारों ओर से पानी से घिरा है। यह नजारा बिल्कुल किसी आइसलैंड जैसा है। यह आइसलैंड हर साल पेंटेड स्टॉर्क के प्रजनन का ठिकाना बनता है।
चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक, इनके आने का सिलसिला अक्सर 15 अगस्त के बाद शुरू होता था, लेकिन इस बार ये 6 अगस्त से ही दिल्ली पहुंचने शुरू हो गए थे। अब तक करीब 300 पेंटेड स्टॉर्क पहुंच चुके हैं। इनका बड़ा आकार, नारंगी सिर और लंबी संतरी चोंच इनका आकर्षण और बढ़ा रही है।
इन पक्षियों ने झील के बीचों-बीच कीकर के पेड़ों पर घोंसले बनाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि अभी घोंसले बनाने की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। खास बात यह है पेंटेड स्टॉर्क हमेशा बस्ती बनाकर रहते हैं। यह बेहद आकर्षक है कि पेंटेड स्टॉर्क जिस पेड़ पर अपने घोंसले बना रहे हैं, उनकी टहनियों को घोंसला बनाने के लिए नहीं तोड़ रहे हैं। पेंटेड स्टॉर्क चिड़ियाघर के अन्य कटीले वृक्षों की टहनियों को अपनी चोंच से काटकर अपने घोंसलों के लिए सामग्री जुटा रहे हैं।
पेंटेड स्टॉर्क की एक और खास बात है। यहां पहुंचे सभी पेंटेड स्टॉर्क जोड़े में हैं। चिड़ियाघर के क्रत्रिम आइसलैंड के कटीले वृक्षों पर ये सभी जोड़े प्रजनन के लिए घोंसले बनाने में जुटे हैं। उधर, चिड़ियाघर प्रबंधन भी इनकी मेहमाननवाजी में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा। इन पक्षियों के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है।
इनके लिए सुबह-शाम झील में मछलियां डाली जा रही हैं। पेंटेड स्टॉर्क अगले साल मार्च तक यहां रहेंगे। इस दौरान प्रजनन के बाद पैदा होने वाले बच्चों को लेकर पेंटेड स्टॉर्क फिर से हिमायल का रुख करेंगे।