रोहिणी विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के मामले में हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा है कि वीरेंद्र देव दीक्षित कोर्ट में पेश हो वरना उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करना पड़ेगा।
हाईकोर्ट ने बाबा को तलाश करने का निर्देश सीबीआई को दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान राजधानी में आश्रम की आठ और शाखाओं का पता चला है। अदालत ने सभी आश्रमों की सूची कोर्ट में निरीक्षण करने वाली टीम को देने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा कोर्ट ने महिला आयोग व पुलिस की टीम को रोकने वाली रुचि गुप्ता के खिलाफ अदालती अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई चार जनवरी 2018 को होगी।
वकील से मांगी बाबा की जानकारी
baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने शुक्रवार को बाबा की जानकारी वकील आलोक पोपने से मांगी। आलोक ने कोर्ट को बताया कि उसने दीपक डी सिल्वा उर्फ थोमस से बात की थी लेकिन बाबा का कोई पता नहीं चला है।
कोर्ट ने कहा कि बाबा को पेश करने की जिम्मेदारी आलोक पोपने पर है। इस पर पोपने ने कहा कि वह बाबा का वकील नहीं, केवल आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का वकील है। इसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख पर दीपक डी सिल्वा उर्फ थॉमस को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल व अधिवक्ता नंदिता राव ने कोर्ट को बताया कि आयोग की टीम ने बृहस्पतिवार को 41 लड़कियों को निकाला है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।
स्वास्थ्य जांच के दिए निर्देश
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ये लड़कियां बीमार हैं और इनकी मेडिकल करवाने की जरूरत है। इस पर कोर्ट ने उन लड़कियों की स्वास्थ्य जांच का निर्देश दे दिया। सुनवाई के दौरान रुचि गुप्ता कोर्ट में पेश हुई।
कोर्ट के समक्ष अधिवक्ता नंदिता राव, अजय वर्मा व स्वाति मालीवाल ने कहा कि रुचि गुप्ता ने ही कोर्ट द्वारा नियुक्त टीम को प्रवेश करने से रोका और टीम को बंधक बनाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि अदालती आदेश में बाधा डालने के लिए रुचि के खिलाफ अदालती अवमानना का नोटिस जारी किया जाता है। अधिवक्ता आलोक पोपने ने रुचि गुप्ता की ओर से नोटिस का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
'आश्रम में किसी को बंधक नहीं रखा गया है, वहां केवल पढ़ाई होती है और ज्ञान दिया जाता है'
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कोर्ट के समक्ष रुचि गुप्ता ने कहा कि आश्रम पहुंची टीम ने जबरन प्रवेश करने की कोशिश की और कोर्ट का आदेश नहीं दिखाया। इसके अलावा टीम के साथ पहुंचे लोगों व पुलिस ने महिलाओं से धक्का मुक्की की। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह हलफनामा दायर करे उसकी सुनवाई होगी।
कोर्ट के समक्ष पेश एक एक अन्य महिला निर्मला देवी ने कहा कि आश्रम में किसी को बंधक नहीं रखा गया है, वहां केवल पढ़ाई होती है और ज्ञान दिया जाता है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा यह कैसा आश्रम है जहां नाबालिग लड़कियों को बंधक बनाकर उन्हें तालों में बंद कर रखा जाता है और उनके माता पिता को मिलने नहीं दिया जाता। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।