हाईकोर्ट ने कहा कि कहा कि सीबीएसई को अपनी पुन: मूल्यांकन नीति को खत्म नहीं करना चाहिए, क्योंकि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गलतियां भी पाई जाती है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने 12 वीं कक्षा के छात्र द्वारा अंग्रेजी व गणित की पुन: मूल्यांकन के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की। अदालत ने सीबीएसई से कहा आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, आप भी गलतियां कर सकते है।
सीबीएसई के अधिवक्ता ने अपने जवाब में कहा कि पुन: मूल्यांकन की नीति को खत्म कर दिया गया, क्योंकि देश भर में बोर्ड की परीक्षा देने वाले 10 लाख छात्रों में से केवल 0.21 प्रतिशत गलतियां थीं।
अदालत ने उनके जवाब पर असंतुष्टि जताते हुए कहा कि आपके कथन के अनुसार ही 2100 छात्रों का करियर दांव पर रहता है। अदालत ने कहा हम सभी जानते हैं कि अंक व प्रतिशत पर क्या होता है। हालांकि अदालत ने छात्रा के पुन: मूल्यांकन के लिए याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया लेकिन सीबीएसई को कहा कि यदि वह कॉपी के लिए आवेदन करती है तो उसे उत्तर पुस्तिका दी जाए।
सीबीएसई के वकील ने कहा याची की उत्तर पुस्तिका का पुन: सत्यापन किया गया है और उसके अंकों में कोई बदलाव की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा पुन: सत्यापन का परिणाम वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
अदालत ने मामले की सुनवाई 19 जून को तय कर दी। इसी दिन इसी मुद्दे पर दायर अन्य याचिका भी विचाराधीन है। उक्त याची ने कहा था कि सीबीएसई ने उड़ीसा हाईकोर्ट को बताया था कि पुन: मूल्यांकन की सुविधा है। अदालत ने उक्त जवाब की प्रति पेश करने का निर्देश दिया था।