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नरेला की खतरनाक जेल का नया मॉडल: AI कैमरा-जैमर और वर्चुअल कोर्ट सब होगा अंदर, बाहर निकलना होगा मुश्किल

Wed, 08 Jul 2026 09:59 AM IST
अनुज कुमार राजीव कुमार, नई दिल्ली

सार

High-security jail under construction in Delhi: नरेला में बन रही हाई-सिक्योरिटी जेल हाई-रिस्क कैदियों (आतंकवादी-गैंगस्टर) के लिए पूरी तरह डिजिटल और एआई आधारित होगी। हर कैदी को अलग सेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कोर्ट और एडवांस्ड सुरक्षा सिस्टम से जेल के अंदर ही सब कुछ संभव, बाहर ले जाने की जरूरत खत्म होगी।
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नरेला में बन रही हाई-सिक्योरिटी जेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में हाई-रिस्क कैदियों की सुरक्षा और निगरानी का तरीका पूरी तरह बदलने की तैयारी है। नरेला में बनने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल एक नई जेल नहीं होगी, बल्कि तकनीक आधारित कारागार प्रबंधन का ऐसा मॉडल होगी, जिसमें कैदियों की निगरानी, आवाजाही, पेशी और सुरक्षा से जुड़ी लगभग हर प्रक्रिया डिजिटल और स्वचालित प्रणाली के जरिये संचालित होगी। केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता देगी, जबकि शेष लागत दिल्ली सरकार वहन करेगी।

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तिहाड़ जेल देश के सबसे बड़े जेल परिसरों में से एक है। यहां लंबे समय से क्षमता से दो गुना करीब 20 हजार कैदी रखे जा रहे हैं। इससे सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और पुनर्वास व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। आतंकवाद, संगठित अपराध के हाई-रिस्क कैदियों को अदालत में पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाना भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है। 

नई हाई-सिक्योरिटी जेल का उद्देश्य ऐसे कैदियों को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में रखना है। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य नरेला हाई-सिक्योरिटी जेल को केवल एक नई जेल के रूप में विकसित करना नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तकनीक आधारित कारागार प्रबंधन के मॉडल के तौर पर स्थापित करना है। 

इस जेल की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसे विशेष रूप से हाई-रिस्क कैदियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक कैदी को अलग सेल में रखा जाएगा, ताकि उनके बीच संपर्क, गैंग नेटवर्किंग और जेल के भीतर आपराधिक गतिविधियों की संभावना न्यूनतम रहे। 

पेशी के लिए कैदियों को बाहर ले जाने की जरूरत नहीं होगी...
पूरे परिसर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे, बॉडी-वॉर्न कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम, फुल बॉडी स्कैनर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर और मोबाइल सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे। 
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जेल परिसर में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और इन-हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिससे हाई-रिस्क कैदियों को हर पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी। इससे सुरक्षा बलों पर दबाव घटने के साथ रास्ते में होने वाले सुरक्षा जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।
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