नई हाई-सिक्योरिटी जेल का उद्देश्य ऐसे कैदियों को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में रखना है। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य नरेला हाई-सिक्योरिटी जेल को केवल एक नई जेल के रूप में विकसित करना नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तकनीक आधारित कारागार प्रबंधन के मॉडल के तौर पर स्थापित करना है।
इस जेल की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसे विशेष रूप से हाई-रिस्क कैदियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक कैदी को अलग सेल में रखा जाएगा, ताकि उनके बीच संपर्क, गैंग नेटवर्किंग और जेल के भीतर आपराधिक गतिविधियों की संभावना न्यूनतम रहे।
पेशी के लिए कैदियों को बाहर ले जाने की जरूरत नहीं होगी...
पूरे परिसर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे, बॉडी-वॉर्न कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम, फुल बॉडी स्कैनर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर और मोबाइल सिग्नल जैमर लगाए जाएंगे।
जेल परिसर में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और इन-हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिससे हाई-रिस्क कैदियों को हर पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी। इससे सुरक्षा बलों पर दबाव घटने के साथ रास्ते में होने वाले सुरक्षा जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।