उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में एक पुलिस अधिकारी सुरेंद्र कुमार माथुर को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने पुलिस आयुक्त से थानों में असलाह रजिस्टर के रखरखाव में हुई विसंगतियों पर गौर करने को कहा है।
जस्टिस मुक्ता गुप्ता और पूनम ए बंबा की खंडपीठ ने कहा, यह स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सक्षम नहीं है कि अपीलकर्ता ने एक उचित संदेह से परे हत्या की है। ऐेसे में सजा के फैसले को रद्द किया जाता है।
पीठ ने कहा, अभियोजन पक्ष हत्या का उद्देश्य व अपीलकर्ता और मृतक के बीच वित्तीय विवाद को भी साबित नहीं कर पाया। इसके अलावा मृतक के पिता यानि अहम गवाह ने मामले का समर्थन नहीं किया है। दोनों के बीच किसी भी वित्तीय विवाद को साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं है, जो कथित अपराध करने का मकसद हो सकता है।