भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता, ओपी शर्मा व जगदीश प्रधान की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जब चुनाव आयोग ने कैलाश गहलौत को अयोग्य ठहरा दिया था तो वह किस अधिकार से दिल्ली विधानसभा के सत्र में गए थे।
बता दें कि चुनाव आयोग ने अधिवक्ता प्रशांत पटेल की शिकायत पर सुनवाई के बाद आप के 20 विधायकों को लाभ का पद लेने का दोषी मानते हुए 19 जनवरी 2018 को अयोग्य ठहराया था।
आयोग की सिफारिशों पर राष्ट्रपति ने 20 जनवरी को अपनी स्वीकृति दे दी थी। इन पूर्व विधायकों में दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलौत भी शामिल थे।
हालांकि इन पूर्व विधायकों ने चुनाव आयोग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले फैसला सुरक्षित रख लिया था।