दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक वीडियो पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र व दिल्ली सरकार से कोरोना मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं और हेल्पलाइन सुविधाओं की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
वीडियो में धर्मेंद्र भरद्वाज नाम के एक व्यक्ति ने कोरोना संकट में अपनी लाचारी और केंद्र व दिल्ली सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबरों पर गैर जिम्मेदाराना रवैये को उजागर किया है।
वीडियो में भरद्वाज ने दावा किया कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, वहां सभी सुविधाएं मुहैया कराने जैसे सरकार के सभी दावे हवाई हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपनी कोरोना पीड़ित मां के लिए वेंटिलेटर और बिस्तर प्राप्त करने के लिए दर-दर भटकना पड़ा।
कई अस्पतालों में धक्के खाने के बाद जब उसने दिल्ली व केंद्र सरकार की हेल्पलाइन पर फोन किया तो वहां से भी कोई सार्थक जवाब नहीं मिला। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की खंड पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में एक न्यायमित्र नियुक्त किया है और केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल की पीठ 3 जून को इस मामले में सुनवाई करेगी। हाईकोर्ट ने साथ ही दोनों सरकारों को हेल्पलाइन की क्षमताओं का आकलन करने और यह बताने को कहा है कि क्या हेल्पलाइन वर्तमान व भविष्य के अपेक्षित कॉल ट्रैफिक से निपटने के लिए तैयार हैं।
कोर्ट ने साथ ही कहा कि तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए ऐसा लगता है कि जीएनसीटीडी के हेल्पलाइन नंबरों पर लोगों को यह भी बताना चाहिए कि किस अस्पताल में कितने बिस्तर उपलब्ध हैं, कहां कितने वेंटिलेटर हैं। कॉल करने वाले के घर के आस पास सरकारी व निजी अस्पतालों में क्या सुविधाएं हैं आदि जानकारी देनी चाहिए।