शरजील इमाम जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत हिंसा की साजिश रचने का आरोप है। उनकी ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मुकदमे की सुनवाई में असामान्य देरी हो रही है। चार्ज फ्रेम करने पर बहस 200 दिनों से अधिक समय से जारी है, लेकिन अब तक आरोप तय नहीं हो सके हैं।
इसी वर्ष जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, हालांकि यह छूट दी थी कि यदि मुकदमे में उल्लेखनीय प्रगति नहीं होती है तो वह नई जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अब उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया है।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान हिंसा की साजिश रची गई थी, जबकि शरजील इमाम लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।