हाईकोर्ट ने दिल्ली हिंसा के पीड़ितों को राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह कहते हुए इसके खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने कहा, यह नीतिगत मामला है और अदालत इसमें ‘हस्तक्षेप’ नहीं करेगी। मुआवजा बिना किसी भेदभाव के दिया जा रहा है। इसमें कुछ गलत नहीं है। ऐसे मामले में कोर्ट फिलहाल किसी तरह के हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं समझता। साथ ही हाईकोर्ट ने दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मुआवजा सिर्फ दंगा पीड़ितों को मिले।
पीठ भाजपा नेता नंद किशोर गर्ग की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गर्ग ने दावा किया था कि दिल्ली हिंसा में पुलिस को चोट पहुंचाने वाले आरोपी और पीड़ित दोनों लोग सरकार के मुआवजे का फायदा उठाएंगे। ऐसे में दिल्ली सरकार आरोपी और पीड़ित की पहचान करने की क्या प्रक्रिया अपना रही है।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने हिंसा में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का एलान किया है। इसके लिए सरकार ने देश के कई प्रमुख अखबारों में एक फॉर्म प्रकाशित किया है, जिसे भरकर सरकार से मदद का दावा किया जा सकता है। सरकार हिंसा में मारे गए व्यस्क मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये की मदद देगी।
इसमें से एक लाख रुपये तुरंत दिए जाएंगे और 9 लाख रुपये की राशि कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद मिलेगी। जबकि हिंसा में जान गंवाने वाले नाबालिग मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये जाने का एलान किया गया है। अगर हिंसा में किसी को स्थायी रूप से चोट पहुंची है तो उसे भी पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। साथ ही गंभीर रूप से घायलों को दो लाख रुपये दिए जाएंगे।