पत्नी की क्रूरता के कारण गुजारा भत्ते से इन्कार का आधार नहीं : हाईकोर्ट
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तलाक की कार्यवाही में पत्नी के खिलाफ क्रूरता के निष्कर्ष घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत उसके भरण-पोषण से इन्कार करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने पति को अपनी पत्नी को 50 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की।
उच्च न्यायालय ने यह फैसला एक सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ एक महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें पति को भरण-पोषण और मुआवजे के लिए प्रति माह एक लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
मामला 1991 में हुई एक शादी से जुड़ा है, जहां उसी साल एक बच्चे का जन्म हुआ। हालांकि, अगले डेढ़ दशक में दोनों में खटास आ गई, जिसके कारण उन्हें 2009 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करनी पड़ी।
सत्र अदालत ने पत्नी को भुगतान के लिए कोई अंतरिम गुजारा भत्ता तय किए बिना मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेज दिया, जिसके परिणामस्वरूप पत्नी ने आगे और विशिष्ट राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।