हाईकोर्ट ने गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 जांच में तेजी लाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को फिर से निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं की जांच के अनुरोध को तत्काल माना जाना चाहिए और नतीजे जल्द घोषित किए जाने चाहिए। हालांकि दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करने से पहले कोविड-19 जांच जरूरी नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं की जल्द कोविड-19 जांच का अनुरोध मानने, नमूने लेने और नतीजा घोषित करने के बीच लंबा समय नहीं होना चाहिए। अदालत ने कहा कि जो गर्भवती महिलाएं प्रसूति के लिए जा रही हैं, वे जांच और नतीजे के लिए पांच-छह दिन इंतजार नहीं कर सकती हैं।
दिल्ली सरकार ने पीठ से कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से जारी परामर्श के तहत जांच का परिणाम एक घंटे के अंदर घोषित कर दिया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने जांच के लिए अनुरोध को पूरा करने की समय सीमा पर कुछ नहीं कहा।
वहीं पीठ ने सरकार से पूछा कि गर्भवती महिला को भर्ती करने के लिए क्या रैपिड जांच से निगेटिव आई रिपोर्ट स्वीकार्य है या आरटी-पीसीआर जांच करानी जरूरी है। हालांकि इससे पहले दिल्ली सरकार ने पीठ को आश्वासन दिया था गर्भवती महिला की कोविड-19 जांच भर्ती होने के बाद भी की जा सकती है।