अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर किसी भी दस्तावेज के बिना कोई यह कैसे मान सकता है कि पीड़िता नाबालिग है, यहां तक कि एक बड़ी आयु की लड़की भी 12वीं कक्षा में हो सकती है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की धारा 6 लागू करने के लिए पुलिस को फटकार लगाई है। दरअसल पुलिस ने इस धारणा के आधार पर यह धारा लगाई कि चूंकि पीड़िता बारहवीं कक्षा की छात्रा थी, इसलिए नाबालिग होनी चाहिए।
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न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने पुलिस की और से पेश वकील से पूछा कि इस मामले में प्रावधान कैसे लागू किया गया। वकील ने कहा कि चूंकि घटना के समय पीड़िता 12वीं कक्षा में थी इसलिए यह माना गया कि नाबालिग होगी। दरअसल दोनों पक्षों के बीच समझाते के आधार पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है।
अदालत ने सरकारी वकील के तर्क को बेहद हास्यास्पद बताते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर किसी भी दस्तावेज के बिना कोई यह कैसे मान सकता है कि पीड़िता नाबालिग है, यहां तक कि एक बड़ी आयु की लड़की भी 12वीं कक्षा में हो सकती है।
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इसके बाद वकील ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। चूंकि जांच अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं थे। अदालत ने संबंधित डीसीपी को सुनवाई की अगली तारीख पर पेश होने के लिए नोटिस जारी किया ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि आईओ अदालत में क्यों मौजूद नहीं थे।