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कैग की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका रद्द

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हाईकोर्ट ने शशी कांत शर्मा की बतौर नियंत्रक, महालेख परीक्षक (कैग) नियुक्त को उचित ठहराया है। अदालत ने शर्मा की चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर उन्हें भारी राहत प्रदान कर दी।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो शर्मा की ईमानदारी व क्षमता पर सवाल खड़ा करता हो। खंडपीठ ने अपने 74 पृष्ठों के फैसले में कहा कि इसके अलावा ऐसा भी कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि वे इस पद के योग्य नहीं है।

खंडपीठ ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद यह भी स्पष्ट है कि शर्मा के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला विचाराधीन नहीं है और न ही उनके खिलाफ अनुशानात्मक कार्यवाही लंबित है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को रद्द करने का कोई आधार नहीं है।
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ट्रक खरीद के मामले में फंसाया!

शर्मा की नियुक्ति को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन.गोपालस्वामी, पूर्व मुख्य नेवी चीफ आर.एच.तेहलानी, एल.रामदास, पूर्व उप कैग बी.पी.माथुर, कमलकांत जयसवाल, रामास्वामी आर ईयर, ईएएस शर्मा (सभी पूर्व सचिव विभिन्न मंत्रालयों में कार्यरत्त) ने चुनौती दी थी।

याची ने आरोप लगाया था कि शर्मा की नियुक्ति मनमाने ढंग से व बिना पारदर्शिता बरते नियमों का उल्लंघन कर की गई है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। याची ने तर्क रखा था कि शर्मा अपने अन्य विभागों में कार्यकाल के दौरान काफी विवादों में रहे है।

इतना ही नहीं कई मामलों में वित्तिय अनियमितताओं के आरोप में जांच चल रही है। इस प्रकार विवादित टाट्रा ट्रक खरीद मामला भी इन्हीं मामलों में शामिल है। खंडपीठ ने कहा कि याची ने मात्र संदेह के आधार पर याचिका दायर की लेकिन कोई भी ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया। ऐसे मेंयाचिका रद्द की जाती है।
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