हाईकोर्ट ने शशी कांत शर्मा की बतौर नियंत्रक, महालेख परीक्षक (कैग) नियुक्त को उचित ठहराया है। अदालत ने शर्मा की चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर उन्हें भारी राहत प्रदान कर दी।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो शर्मा की ईमानदारी व क्षमता पर सवाल खड़ा करता हो। खंडपीठ ने अपने 74 पृष्ठों के फैसले में कहा कि इसके अलावा ऐसा भी कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि वे इस पद के योग्य नहीं है।
खंडपीठ ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद यह भी स्पष्ट है कि शर्मा के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला विचाराधीन नहीं है और न ही उनके खिलाफ अनुशानात्मक कार्यवाही लंबित है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को रद्द करने का कोई आधार नहीं है।