दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव के समय किए गए तबादलों की स्थिति बताने की मांग वाली जनहित याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई जनहित शामिल नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि नागेश्वर राव के आदेश से प्रभावित लोगों को अदालत की शरण में आना चाहिए और इससे कोई जनहित नहीं जुड़ा है। खंडपीठ ने कहा कि प्रभावित लोगों को अदालत आने दीजिए। याचिका खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले हुसैन मुईन फारूक ने लगाई थी।
राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त लोगों के विज्ञापन करने पर उठाया सवाल
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित लोगों के विज्ञापन करने पर रोक की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मुद्दे पर सिंगल जज ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। इसे अब खंडपीठ के समक्ष दायर किया गया है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर सुनवाई की कोई जल्दबाजी नहीं है। याचिका पर सुनवाई के लिए 26 फरवरी की तारीख तय की गई है।
चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी व धन के प्रयोग के खिलाफ याचिका खारिज
राष्ट्रीय व राज्य स्तर के मंत्रियों के अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी और कोष के इस्तेमाल की परंपरा का विरोध करने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से संबंधित है।
खंडपीठ ने कहा कि याची को अपनी याचिका लेकर चुनाव आयोग के समक्ष जाना चाहिए। यह याचिका बीआर हरीश बाबू ने दायर की थी। याचिका में दलील दी गई थी कि सरकार में निर्वाचित होने के बाद केंद्र या राज्यों के मंत्रियों की निष्ठा देश के नागरिकों के प्रति होती है, उनके राजनीतिक दलों के प्रति नहीं।