दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन-5 के बीच अनलॉक-1 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए याची पर 20 हजार का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि अनलॉक-1 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है और यह ऐसा निर्णय नहीं है, जिसे जल्दबाजी में लागू किया गया हो।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह फैसला इस आधार पर लिया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से कोई प्रभावित भी न हो और लॉकडाउन के कारण काम के अभाव में कोई भुखमरी का शिकार न हो।
पीठ ने कहा कि यह याचिका बिना किसी ठोस आधार के गलत तरीके से सिर्फ पब्लिसिटी बटोरने के मकसद से दायर की गई है। इस बीच पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह इस स्थिति पर संज्ञान रखे और इसका बारीकी से मूल्यांकन करे। यदि यह पाया जाए कि संक्रमण की दर बढ़ रही है, तो वे हमेशा अपने निर्णय की समीक्षा कर सकते हैं और उन पर अंकुश लगा सकते हैं। यह याचिका एक लॉ स्टूडेंट की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में याची ने दावा किया था कि केंद्र सरकार द्वारा अनलॉक-1 का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है, जिसके बाद से कोरोना संक्रमण के मामलों में और तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद से दिल्ली में कोरोना के कंटेनमेंट जोन की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।