दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान शिक्षकों को वेतन नहीं देने पर शुक्रवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाई। इस दौरान पीठ ने कहा कि महामारी के समय में शिक्षक भी कोरोना योद्धाओ की तरह काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवाओं के बदलें पारिश्रमिक नहीं देना बेहद शर्म कीर बात है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीठ ने शिक्षक संघ की ओर से दायर याचिका को जनहित याचिका में बदल दिया। इसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष 29 जून के लिए सूचीबद्ध कर दी है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह बहुत अफसोस की बात है कि शिक्षक कोरोना योद्धाओं की तरह ही काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें मार्च से वेतन नहीं दिया गया। अदालत ने इसका भी संज्ञान लिया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने डॉक्टरों और सफाई कर्मचारियों को भी बकाया वेतन नहीं दिया है।
इससे पहले पीठ ने 18 जून को उत्तर दिल्ली नगर निगम को शिक्षकों को बकाया वेतन एक सप्ताह में देने का निर्देश दिया था। इस दौरान निगम ने पीठ को बताया था दिल्ली सरकार से पैसा नहीं मिल पाने के कारण शिक्षक ही नहीं बल्कि ए ग्रेड अधिकारियों, डॉक्टरों और सफाई कर्मचारियों तक को वेतन नहीं मिल पा रहा है।
इसके साथ ही पीठ ने इस तथ्य पर भी गौर किया कोर्ट के निर्देशों के बाद निगम ने शिक्षकों को महज मार्च माह के वेतन का भुगतान किया। दिल्ली सरकार पर निगम द्वारा लगाए गए पैसा जारी ना करने के आरोप पर पीठ ने दिल्ली सरकार को इस संबंध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।