सीएनजी फिटनेस घोटाले में उप राज्यपाल नजीब जंग को एक और झटका लगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले की पैरवी के लिए विशेष वकील की नियुक्ति पर रोक लगा दी है।
बता दें कि उप राज्यपाल ने दिल्ली सरकार के वकील को पैरवी से अलग कर दिया था। तीस हजारी अदालत ने भी उनके निर्णय को मान लिया था। न्यायमूर्ति आशुतोष ने दिल्ली सरकार द्वारा उनके निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए यह रोक लगाई है।
इतना ही नहीं, अदालत ने निचली अदालत में विचाराधीन मामले की सुनवाई पर भी रोक लगाते हुए उपराज्यपाल को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। अदालत ने उन्हें स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर उनके फैसले को रद्द कर दिया जाए।
कैसे स्वयं विशेष वकील की नियुक्ति कर सकते हैं
अदालत ने मामले की सुनवाई 5 जनवरी 2016 तय की है। इससे पहले दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजयोग ने अदालत को बताया कि उपराज्यपाल ने गैरकानूनी तरीके से पत्र लिखकर विशेष वकील की नियुक्ति कर दी।
उन्होंने कहा कि जिस मामले में उपराज्यपाल की ही संदिग्ध भूमिका की जांच हो रही हो, उसमें वे कैसे स्वयं विशेष वकील की नियुक्ति कर सकते हैं।
ऐसे में उपराज्यपाल के विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने संबंधी पत्र को खारिज किया जाए।
क्या है ये पूरा मामला
करीब 100 करोड़ रुपये के सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले को लेकर उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के बीच ठनी हुई है। उपराज्यपाल इस मामले में सीबीआई द्वारा मुकदमा लगाने संबंधी आवेदन को नामंजूर कर चुके है।
दिल्ली सरकार ने इस मामले की जांच के लिए जैसे ही न्यायिक आयोग का गठन किया, उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त एसीबी के चीफ एमके मीणा ने अदालत में आरोपपत्र दायर करवा दिया।
फिर उपराज्यपाल ने एक पत्र के जरिए दिल्ली सरकार के वकील बीएस जून की अपेक्षा संजय गुप्ता को बतौर विशेष सरकारी वकील नियुक्त कर दिया।