पीड़िता ने कथित दुष्कर्म और पुलिस में इसकी शिकायत देने की अवधि में आरोपी को 500 से ज्यादा बार फोन किया था। इस तथ्य के मद्देनजर हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को पलटने से इंकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने पीड़िता की गवाही को अविश्वसनीय व विरोधाभासी करार दिया। निचली अदालत ने आरोपी को जनवरी 2019 में बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता ने 16 दिसंबर 2016 से 29 जनवरी 2017 की अवधि में आरोपी को 529 बार फोन किया।
इसके अलावा पीड़िता यह भी बताने में नाकाम रही है कि उसकी मुलाकात आरोपी से कैसे हुई और उससे दुष्कर्म कैसे हुआ और उसने एफआईआर कराने में इतना विलंब क्यों किया।
हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि पीड़िता ने आरोपी से अपना फोन वापस मिलने के बाद 30 दिन तक पुलिस को फोन नहीं किया बल्कि आरोपी को 529 बार फोन किया। उसने अपना फोन महिला जांच अधिकारी को भी नहीं दिया। अदालत के पूछने पर उसने कहा कि फोन जांच अधिकारी ने नहीं मांगा था।
याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़िता सीआरपीएफ के रिटायर कमांडेंट की बेटी और खुद प्रोफेसर है और ऐसे हालात में यह नहीं माना जा सकता कि फोन वापस मिलने के बाद भी वह पुलिस को फोन करने की स्थिति में नहीं थी।
महिला यह भी साबित नहीं कर पाई कि उसे नशीला पदार्थ दिया गया था, जिसका असर तीन दिन तक उस पर था। इसके अलावा उससे शारीरिक संबंध की बात भी साबित नहीं हुई है। इन हालात में पीड़ित की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।