हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ आपराधिक मामले में कांस्टेबल डीसीपीओ के पद के लिए एक सफल उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने के निर्णय को गलत ठहराया है। अदालत ने कहा बिना अपराध साबित हुए उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को दर्ज आपराधिक मामले में कांस्टेबल डीसीपीओ के पद के लिए एक सफल उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने के निर्णय को गलत ठहराया है। अदालत ने बल को उसे नियुक्ति पत्र देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा बिना अपराध साबित हुए उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
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न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की खंडपीठ ने बात पर भी ध्यान दिया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में रोक लगा दी थी। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति आपराधिक मामले के परिणाम पर सशर्त की जा सकती है। पीठ ने कहा यदि याचिकाकर्ता को दोषी ठहराया जाता है तो सीआईएसएफ बिना किसी जांच या नोटिस दिए उसके रोजगार को समाप्त करने के लिए स्वतंत्र होगा।
इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने कार्यकाल के दौरान अर्जित वेतन के अलावा, दोषी ठहराए जाने पर किसी भी सेवा लाभ का दावा करने का अधिकार नहीं होगा। याची पर 30 अगस्त 2023 को पुलिस स्टेशन नखासा, जिला संभल (उत्तर प्रदेश) में धारा 376, 377, 354, 364, 511, 323, 504, 506 और 452 के तहत दर्ज एफआईआर दर्ज की गई थी।