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Delhi NCR News: नीट प्रदर्शन की निगरानी पर हाईकोर्ट में बहस, सुनवाई सोमवार तक टली

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जंतर-मंतर पर पुलिस वीडियोग्राफी को केंद्र ने कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी बताया, याचिकाकर्ता ने गोपनीयता के अधिकार का हवाला दिया
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वीडियोग्राफी और निगरानी को लेकर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने का वैध और नियमित उपाय बताया, जबकि याचिकाकर्ता ने इसे नागरिकों के मौलिक गोपनीयता अधिकार का उल्लंघन करार दिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रत्येक प्रदर्शन की वीडियोग्राफी की जाती है। यह किसी विशेष संगठन या प्रदर्शन को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नियमित प्रक्रिया है।
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मेहता ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर गतिविधियां करने के दौरान पूर्ण गोपनीयता का दावा उचित नहीं है। यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो वीडियो रिकॉर्डिंग से जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन आयोजक सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आश्वासन देते हैं।
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याची की ओर से गोपनीयता और डेटा सुरक्षा पर उठाए गए सवाल
सीपीआई(एम) नेता आईसी घोष की जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस 16 से 20 वर्ष के छात्र प्रदर्शनकारियों की निगरानी कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने कहा कि सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान भी नागरिकों का गोपनीयता का अधिकार बना रहता है। उन्होंने डेटा संग्रह, भंडारण और उपयोग के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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