हाईकोर्ट ने राजधानी में बड़ी तादाद में बच्चों के लापता होने पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि बच्चों का गुम होना आतंकवाद के समान बुरा है। यह एक खौफनाक अहसास है। अगर हम अपने बच्चों को सुरक्षित नहीं रख सकते तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व संगीता ढिंगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा बच्चों के गायब होने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर तब तक कुछ नहीं हो सकता जब तक पुलिस फोर्स संवेदनशील नहीं होती।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के उपायुक्त व नोडल अधिकारी राजीव शर्मा ने गुमशुदा बच्चों को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दायर की। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2016 से अभी तक राजधानी में करीब 2,252 बच्चे लापता हुए जिसमें 1,293 बरामद किए गए और 963 की तलाश जारी है।
रिपोर्ट में बताया गया कि 2011 में करीब 5,111 बच्चे लापता हुए जिसमें 4,602 बरामद किए गए। 509 की तलाश जारी है। वहीं, 2015 में लापता 7,982 बच्चों में से 5961 बरामद हुए और 1967 की तलाश जारी है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में सामने आया है कि बच्चे पढ़ाई के दबाव, काम की तलाश, असामाजिक तत्वों के संपर्क, प्रेम प्रसंग,अपहरण, मानव तस्करी और अज्ञात कारणों से लापता होते हैं।