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बच्चों के गुम होने पर हाईकोर्ट चिंतित,‘सम विषम’ जैसे प्रचार पर पूछा सवाल

Fri, 20 May 2016 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोर्ट - फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने राजधानी में बड़ी तादाद में बच्चों के लापता होने पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि बच्चों का गुम होना आतंकवाद के समान बुरा है। यह एक खौफनाक अहसास है। अगर हम अपने बच्चों को सुरक्षित नहीं रख सकते तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
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न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व संगीता ढिंगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा बच्चों के गायब होने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर तब तक कुछ नहीं हो सकता जब तक पुलिस फोर्स संवेदनशील नहीं होती।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के उपायुक्त व नोडल अधिकारी राजीव शर्मा ने गुमशुदा बच्चों को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दायर की। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2016 से अभी तक राजधानी में करीब 2,252 बच्चे लापता हुए जिसमें 1,293 बरामद किए गए और 963 की तलाश जारी है।
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रिपोर्ट में बताया गया कि 2011 में करीब 5,111 बच्चे लापता हुए जिसमें 4,602 बरामद किए गए। 509 की तलाश जारी है। वहीं, 2015 में लापता 7,982 बच्चों में से 5961 बरामद हुए और 1967 की तलाश जारी है।रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में सामने आया है कि बच्चे पढ़ाई के दबाव, काम की तलाश, असामाजिक तत्वों के संपर्क, प्रेम प्रसंग,अपहरण, मानव तस्करी और अज्ञात कारणों से लापता होते हैं।
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कोर्ट ने यातायात पुलिसकर्मियों को भी लगाई फटकार

पुलिस - फोटो : Demo pic
विभाग इस मुद्दे को प्राथमिकता से ले रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में पुलिस ने खासकर लापता बच्चों की तलाश के लिए ऑपरेशन मिलाप शुरू किया गया। जिसका काम केवल लापता बच्चों की तलाशकर उन्हें उनके परिजनों से मिलाना है।

ऑपरेशन मिलाप के तहत 2014-14 में करीब 809 व 2016 में अब तक 829 बच्चों को बरामद कर उनके परिवार से मिलाया गया है। महिला व बाल कल्याण मंत्रालय के अधिवक्ता ने कहा कि बच्चों को जल्दी तलाशने के हर संभव प्रयास किए जा रहें है। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस मसले पर काफी अच्छे कदम उठाए गए है, 75 प्रतिशत से अधिक लापता बच्चों को बरामद किया जा चुका है।

अदालत ने उनके तर्कों पर असहमति जताते हुए नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सम विषम योजना की तरह प्रशासन द्वारा लापता बच्चों को तलाशने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पता क्यों नहीं चलता। हमने सम विषम के बारे में तो काफी सुना है लेकिन ऑपरेशन मिलाप के बारे में शायद ही कोई कुछ जानता हो।

अदालत ने यातायात पुलिसकर्मियों को भी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि ये सिपाही जेब में हाथ डाले या तो बैठे रहते है या फिर मोबाइल पर बातें करते दिखाई पड़ते है। इन लोगों को सड़क पर लावारिस घूम रहे बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने में मदद करनी चाहिए। 
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