औद्योगिक नगर की सड़कों पर अनियंत्रित गति से भाग रहे वाहन मानो डेथ वारंट लेकर घूम रहे हैं। मार्च माह में ही इन वाहनों की चपेट में आकर 15 लोग जान गंवा चुके हैं जबकि इतने ही लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
दरअसल, रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी(आरटीए) के पास सड़क पर अनियंत्रित गति से दौड़ रहे और ओवरलोड वाहनों की निगरानी के लिए न तो संसाधन हैं और न ही तकनीकी स्टाफ। ऐसे में प्राधिकरण डेथ वारंट लेकर घूम रहे इन भारी वाहनों पर अंकुश लग पाएगा कहना मुश्किल है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2015 में हुए सड़क हादसों में 189 लोगों ने जान गंवाई। सबसे ज्यादा हादसे भारी वाहनों से हुए। 55 लोगों ने ट्रक, डंपर, कैंटर और टेंपो की चपेट में आने से जान गंवाई, जबकि 8 लोग ऑटो से हादसे का शिकार हुए।
42 लोगों की मौत की वजह अज्ञात वाहन रहे। सड़क पर ओवर स्पीड और शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली मौत पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में सभी व्यवसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश जारी किया था। सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देश को आरटीए फरीदाबाद कहां तक लागू कर सका है।
आरटीआई से खुली पोल
आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल ने इसकी जानकारी प्राधिकरण से मांगी थी। उन्होंने प्राधिकरण से वाहनों की चेकिंग के लिए जरूरी उपकरण, उनके रखरखाव और इस्तेमाल के लिए तकनीकी स्टाफ की स्थिति और स्टाफ की ड्यूटी समय आदि की जानकारी मांगी थी।
प्राधिकरण से मिले जवाब के मुताबिक फरीदाबाद में कोई भी तकनीकी स्टाफ नहीं है और न ही ओवरस्पीड, ओवरलोडिंग की जांच करने के उपकरण। बताया गया कि ओवर लोडिंग का चालान अनुमान के आधार पर किया जाता है।
वाहनों को कांटे पर या फिर माल बिल्टी में दर्ज वजन के आधार पर ओवरलोडिंग का चालान किया जाता है। ओवरस्पीड नापने का पैमाना नहीं है। यह भी अनुमान के आधार पर किया जाता है।
तो बिना अथॉरिटी करते हैं चालान
आरटीए फरीदाबाद में 14 लोगों का स्टाफ है। इनमें सहायक सचिव, सहायक, अकाउंटेंट, स्टेनो, क्लर्क, चालक और चपरासी शामिल हैं। उनका आरोप है कि इनमें से कोई भी कर्मचारी वाहनों का चालान काटने के लिए नियमानुसार अधिकृत नहीं है।
गति सीमा की नहीं परवाह
डंपरों से होने वाले हादसों का सबसे बड़ा कारण इनकी अनियंत्रित गति को माना जा सकता है। नियमानुसार अधिकतम गति सीमा 40 निर्धारित होने के बावजूद डंपर चालक 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इन्हें दौड़ाते हैं।
ओवर लोडिंग भी एक वजह
गति सीमा से तेज डंपर दौड़ाने के साथ-साथ ओवर लोडिंग भी हादसों की एक सबसे बड़ी वजह बन जाती है। नियमानुसार 9 से 18 टन तक डंपरों में माल लोड किया जा सकता है, लेकिन 20 से 25 टन तक बोझ डलने की वजह से इनके ब्रेक नहीं लग पाते।
बॉडी से होती है छेड़छाड़
क्षमता से ज्यादा माल ढ़ोकर मुनाफा कमाने के लिए डंपरों की बॉडी से छेड़छाड़ करना आम हो गया है। कंपनी फिटेड बॉडी के अलावा बाहरी बॉडी मेकरों से लोहे की शीट से डंपरों की ट्राली को ऊंचा उठा दिया जाता है, ताकि पांच से सात टन ज्यादा माल ढुलाई की जा सके।
किस जोन में कितनी मौतें
सेंट्रल जोन============63
एनआईटी जोन==========78
बल्लभगढ़ जोन=========58