अविवाहित युवतियों और विधवाओं को कानूनी रूप से गर्भपात की अनुमति और आपात स्थिति में गर्भपात की सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 या 26 सप्ताह करने की मांग लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मौजूदा कानून के तहत 20 सप्ताह से अधिक के भ्रूण को नहीं गिराया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की खंडपीठ ने याचिका को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्घ किया है।
अधिवक्ता अमित साहनी ने जनहित याचिका में कहा है कि स्वास्थ्य, कानून व विधि मंत्रालय से पूछा जाए कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के उस प्रावधान में संशोधन कब किया जाएगा, जो 20 सप्ताह से अधिक का गर्भपात कराने की अनुमति नहीं देता। इस प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव 2014 में किया गया था।
मौजूदा कानून केवल दुष्कर्म या गर्भ निरोधकों के नाकाम इस्तेमाल से हुए गर्भ धारण के मामलों का निबटारा करता है, लेकिन यह अविवाहित युवतियों और विधवाओं के गर्भपात के मुद्दे पर बिल्कुल खामोश है। इन महिलाओं को भी गर्भपात कराने का अधिकार दिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में 16 सप्ताह के बाद ही गर्भपात में गड़बड़ी का पता चलता है, उनका निबटारा एमटीपी एक्ट के तहत फास्ट ट्रैक आधार पर किया जाए, ताकि प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा महिला को न उठाना पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कानून में संशोधन का आदेश देने से इंकार कर दिया था।