वहीं, शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि अदालत को यह तय करना है कि क्या एक अपराधी को जमानत दी जा सकती है, जिसने पहले कहा कि उसने ऐसा किया इसके लिए माफी मांगी लेकिन बाद में मुकर गया। वह कह रहा है कि वह नशे में था। नशा कभी बचाव नहीं हो सकता। यह उसका मामला नहीं है कि उन्हें उनकी जानकारी के बिना शराब दी गई थी। यह उनके प्रभाव के कारण था कि एयर इंडिया ने प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का फैसला किया। शिकायत 28 तारीख को थी आरोपी के प्रभाव के कारण ही प्राथमिकी में इतने दिन लग गए।
मिश्रा की ओर से पेश अधिवक्ता मनु शर्मा ने कहा उनके मुवक्किल ने एयर इंडिया द्वारा शुरू की गई जांच प्रक्रिया से बचने का प्रयास नहीं किया था। एयर इंडिया ने पहले ही आंतरिक जांच शुरू कर दी थी। मैं उनके सामने हाजिर हुआ। मैं भागा नहीं। जो कुछ भी हआ नशे में हुआ उनके मुवक्किल का महिला की अपमान करने का कोई इरादा नहीं है। ऐसे में उनके मुवक्किल के खिलाफ गलत धाराए गाई गई है।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने चार जनवरी को उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और आईजीआई थाना पुलिस की टीम ने सात जनवरी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उसे दिल्ली लाया गया। पूछताछ के बाद आरोपी शंकर मिश्रा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट लाया गया। दिल्ली पुलिस ने आरोपी शंकर मिश्रा की तीन दिन की हिरासत की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
क्या है पूरा मामला
महिला ने अपने पत्र में बताया कि वह एयर इंडिया की फ्लाइट AI-102 से न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए यात्रा कर रही थीं। लंच के बाद विमान की लाइट बंद कर दी गई। इसी दौरान नशे में धुत व्यक्ति उनकी सीट के पास आया और मुझपर पेशाब कर दिया। इसके बाद भी वह व्यक्ति मेरे पास ही खड़ा रहा। सहयात्री के कहने के बाद वह वहां से हटा।
महिला ने बताया, घटना के बाद उसके कपड़े, बैग, जूते पेशाब से पूरी तरह भीग चुके थे। उन्होंने इस बारे में क्रू मेंबर्स को जानकारी दी, जिसके बाद एयर होस्टेस आईं और डिसइनफ्कटेंट छिड़क कर चली गईं। थोड़ी देर बाद उन्होंने एक जोड़ी पायजामा और डिस्पोजेबल चप्पल दिया गया। महिला ने बताया, पेशाब करने वाले व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह व्यक्ति वहां से चला गया।