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Swati Maliwal Case: कोर्ट ने बिभव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट का मामला

Fri, 31 May 2024 04:43 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोर्ट ने स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में मुख्यमंत्री के सहयोगी बिभव कुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, हाईकोर्ट ने आरोपी बिभव कुमार की और से गिरफ्तारी के खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
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Swati Maliwal Case - फोटो : PTI
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विस्तार
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तीस हजारी अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) की सांसद स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में मुख्यमंत्री के सहयोगी बिभव कुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 28 मई को दी गई तीन दिन की पुलिस हिरासत शुक्रवार को समाप्त होने के बाद कुमार को अदालत में पेश किया गया। मामले के सिलसिले में उन्हें 18 मई को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

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मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल ने बिभव कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन्हें 14 जून को अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। इसे पूरा करने के लिए समय की आवश्यकता होगी। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले के तथ्यों के मद्देनजर आरोपी बिभव कुमार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है और 14 जून को पेश किया जाता है।

दिल्ली पुलिस ने पूछताछ के बाद बिभव कुमार की 14 दिन की न्यायिक हिरासत मांगी थी। अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने कहा कि उचित जांच के लिए आरोपी को सबूतों से छेड़छाड़ करने से रोकने के लिए और किसी गवाह को प्रलोभन या धमकी देने से रोकने के लिए आरोपी की न्यायिक हिरासत की आवश्यकता है। बचाव पक्ष के वकील रजत भारद्वाज और करण शर्मा ने न्यायिक हिरासत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी जांच में हस्तक्षेप करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं है।
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बिभव की याचिका पर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के आरोपी बिभव कुमार की और से गिरफ्तारी के खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। उस पर सांसद स्वाति मालीवाल पर हमला करने का आरोप है।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने इस पहलू पर प्रारंभिक दलीलें सुनीं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि बिभव के पास मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर करने का वैकल्पिक उपाय है जिन्होंने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति नवीन चावला ने मामले को न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में स्थानांतरित कर दिया, जो संसद सदस्यों और विधानसभा सदस्यों (सांसदों/विधायकों) से जुड़े मामलों के लिए रोस्टर बेंच है।

दिल्ली पुलिस की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि कुमार की याचिका विचारणीय नहीं है, क्योंकि मजिस्ट्रेट अदालत ने इसी तरह की याचिका का निपटारा कर दिया था। जैन की दलीलों का विरोध करते हुए कुमार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने कहा कि उनकी मुख्य प्रार्थना गिरफ्तारी को अवैध घोषित करना है क्योंकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन किया गया है।

उधर, मालीवाल मामले में रिपोर्टिंग रोकने को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने याची को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहां जब मालीवाल को आपत्ति नहीं तो आप कौन होते हैं। यह याचिका मात्र प्रचार के लिए दायर की गई है।

बुधवार को बिभव कुमार ने आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल द्वारा दायर मारपीट मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। बिभव ने याचिका में अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया था। बिभव ने याचिका में अपनी अवैध गिरफ्तारी के लिए मुआवजे की भी मांग की थी। याचिका में बिभव ने कहा कि मेरी गिरफ्तारी अवैध है। मुझे जबरदस्ती पुलिस कस्टडी में रखा गया है। जबरदस्ती कस्टडी में रखने का मुआवजा मिले। पुलिस वालों के खिलाफ विभागीय जांच हो। 



कोर्ट ने बढ़ाई थी तीन दिन की पुलिस हिरासत
अदालत ने 28 मई को आप सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के मामले में गिरफ्तार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार को फिर तीन दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। बिभव की चार दिन की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल की अदालत में पेश किया गया था। पुलिस ने कोर्ट से बिभव की हिरासत पांच दिन की मांगी थी, लेकिन मजिस्ट्रेट ने तीन दिन का दिया। 

इससे पहले 27 मई को तीस हजारी कोर्ट ने बिभव कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। स्वाति मालीवाल केस में बिभव कुमार को दिल्ली पुलिस ने 18 मई को गिरफ्तार किया था। स्वाति मालीवाल ने विभव कुमार पर 13 मई को मुख्यमंत्री आवास पर हमला करने के आरोप लगाए थे। जहां एक तरफ स्वाति ने बिभव पर मारपीट का आरोप लगाया है तो वहीं विभव ने पुलिस में शिकायत दी कि स्वाति मुख्यमंत्री आवास में बिना इजाजत घुस गई थीं। बिभव ने भी स्वाति पर झूठे मामले में फंसाने के आरोप लगाए हैं।

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