जॉनसन एंड जॉनसन के पीड़ितों के लिए मुआवजे को लेकर जल्द ही बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मुआवजा के लिए बीते दिनों फॉर्मूला तैयार करने वाली केंद्रीय समिति को बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि समिति अब नए सिरे से मरीजों के लिए मुआवजा राशि तय करेगी। कहा ये भी जा रहा है कि इससे जॉनसन एंड जॉनसन की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। मंत्रालय उन सैंकड़ों मरीजों को भी न्याय दिलाना चाहता है, जिन्होंने एक से ज्यादा बार ये इम्प्लांट प्रत्यारोपित कराए। इसके बाद जुर्माना राशि कई करोड़ में बढने की संभावना है। हालांकि इसके लिए भी कंपनी का पक्ष लिया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने मुआवजा फॉर्मूला तय करने वाली समिति को दिए हैं निर्देश
प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक समिति ने गलत इम्प्लांट के कारण कंपनी पर 4700 मरीजों के लिए 30 लाख से लेकर 1.20 करोड़ रुपये तक का जुर्माना तय किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के इम्प्लांट कई मरीजों में एक से ज्यादा बार लगे हैं। इन मरीजों को जब पहली बार इम्प्लांट को लेकर परेशानी हुई तो विभिन्न अस्पतालों में इन्हें दोबारा से इसी कंपनी का इम्प्लांट लगाया गया था। जबकि कुछ ऐसे भी मरीज हैं जिनमें तीन बार एक ही कंपनी के इम्प्लांट लगे हैं। चूंकि बार बार इम्प्लांट फेल होने के कारण मरीजों को अतिरिक्त बोझ के अलावा कई सर्जरी से गुजरना पड़ा। इन मरीजों पर समिति ने ध्यान नहीं दिया।
ये है पूरा मामला
जॉनसन एंड जॉनसन कूल्हा प्रत्यारोपण के लिए इम्प्लांट बेचता है। कुछ ही समय पहले इसके खराब इम्प्लांट की वजह से देश के करीब 4700 मरीजों को विकलांगता का शिकार होना पड़ा। इनमें से करीब 3100 मरीजों की पहचान की जा चुकी है। मामले के खुलासे के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कंपनी को तत्काल मरीजों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक मदद करने के निर्देश दिए थे। साथ ही दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी, जिन्होंने पूरे मामले में जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसी रिपोर्ट की समीक्षा करने और मरीजों को मुआवजा राशि दिलवाने के लिए मंत्रालय ने एक अन्य समिति गठित की। डॉ. आरके आर्या की अध्यक्षता में राशर के लिए फॉर्मूला तैयार किया था।
इस तरह तैयार किया था जुर्माना फॉर्मूला
प्रत्येक मरीज को इम्प्लांट के बाद आई दक्कितों को आकलन करते हुए ही समिति ने पहले फॉर्मूला तैयार किया और उसके बाद विकलांगता, आयु और रिस्क फैक्टर को ध्यान में रखते हुए आयुवर्ग और विकलांगता के फीसदी के अनुसार मुआवजा राशि को तय किया। फॉर्मूला में मूल राशि के साथ आयु और रिस्क फैक्टर के साथ गुणा करके उसका 99.37 से भाग देने के बाद 10 लाख रुपये बतौर आर्थिक नुकसान के रुप में जोड़ा।