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डेंगू की दहशत फैलाने वाले अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग कसेगा नकेल 

Tue, 27 Sep 2016 09:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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- फोटो : amar ujala
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डेंगू के नाम पर मरीजों में खौफ फैलाने वाले अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग नकेल कसेगा। स्वास्थ्य विभाग ने रैपिड टेस्ट के आधार पर मरीजों में डेंगू की पुष्टि करने की मनाही की है।
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आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के गुड़गांव चैप्टर के साथ बैठक कर सिविल सर्जन ने इस बारे में आदेश दिए हैं। एलाइजा टेस्ट के बाद ही मरीजों में डेंगू की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी अस्पतालों को इस बाबत पत्र भी लिखा गया है।

दरअसल अस्पतालों में बुखार के मरीजों को रैपिड टेस्ट के आधार पर डेंगू घोषित किया जा रहा है।  एलाइजा की अपेक्षा रैपिड जांच दो गुना महंगी होती है। जबकि डेंगू की गाइडलाइन में रैपिड टेस्ट को अधिक प्रमाणित नहीं बताया गया है।
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सरकारी अस्पताल में एलाइजा विधि से डेंगू की जांच की जा रही है। जिसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू के मरीजों की पुष्टि कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो रैपिड जांच की वजह से डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ी है।

निजी जांच क्लीनिक और अस्पताल पैसे वसूलने के लिए डेंगू की ऐसी जांच कर रहे हैं, जो जरूरी नहीं। जबकि वायरल बुखार में डॉक्टरों को पांच दिनों तक निगरानी के बाद ही जरूरी टेस्ट कराने के लिए कहा गया है। सरकारी केंद्र केवल एलाइजा से डेंगू की पुष्टि करते हैं, जिसे बीते कई सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है।

वहीं, निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की मानें तो रैपिड जांच की जरूरत कुछ विशेष परिस्थितियों में ही होती है। किसी भी साधारण डेंगू मरीज का बुखार यदि दो से तीन दिन के बाद भी नहीं उतर रहा है तो पीसीवी या कंप्लीट पैक्ड वैल्यू जांच के बाद रैपिड जांच की जा सकती है। इसे डेंगू के इलाज के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस में भी बताया गया है। 
 
क्या है रैपिड जांच
रैपिड जांच को डेंगू की कॉमर्शियल जांच बोला जाता है। इस विधि में खून के सैंपल में डेंगू वायरस की एनएस-1 एंटीजन जांच के साथ ही आईजीएम और आईजीएम एंटीजन देखे जाते हैं। इस विधि से जांच में दो से तीन घंटे का समय लगता है। जांच में एक हजार से 1500 का खर्च आता है।
 
डॉ. पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन: रैपिड टेस्ट के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं जा सकती है। सभी अस्पतालों को इस बाबत निर्देश भेजा जा चुका है। एलाइजा रिपोर्ट से ही डेंगू के मरीजों की वास्तविकता का पता चलता है। आईएमए के साथ बैठक कर इस बाबत निर्देश दिया गया है।
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