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सेहत: आरएमएल अस्पताल में पहली बार हुई ‘ब्रेन पेसमेकर’ सर्जरी, चार विभागों की टीम ने पूरी की जटिल शल्य चिकित्सा

Mon, 19 Oct 2026 12:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

काठमांडू निवासी 55 वर्षीय मरीज पर की गई इस सर्जरी को अस्पताल में आधुनिक न्यूरोसर्जरी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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विस्तार
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हाथ-पैरों में कंपन, मांसपेशियों में जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रहे पार्किंसंस मरीजों के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ने अहम उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) यानी ‘ब्रेन पेसमेकर’ की सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। काठमांडू निवासी 55 वर्षीय मरीज पर की गई इस सर्जरी को अस्पताल में आधुनिक न्यूरोसर्जरी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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मरीज लंबे समय से हाथ-पैरों में कंपन, मांसपेशियों में जकड़न, चलने-फिरने में धीमेपन और शरीर की अनियंत्रित गतिविधियों से परेशान था। दवाओं के असर में उतार-चढ़ाव के कारण उसकी दिनचर्या प्रभावित हो रही थी। मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद विशेषज्ञों ने डीबीएस तकनीक से उपचार का फैसला किया।

मस्तिष्क के विशेष हिस्सों में लगाए जाते हैं इलेक्ट्रोड
डीबीएस में मस्तिष्क के विशेष हिस्सों में छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो नियंत्रित विद्युत संकेतों के जरिये असामान्य तंत्रिका गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। उपयुक्त मरीजों में इस तकनीक से कंपन, जकड़न और चलने-फिरने में धीमेपन जैसे लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका लाभ मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
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चार विभागों के विशेषज्ञों ने मिलकर किया ऑपरेशन
सर्जरी न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. शरद पांडे के नेतृत्व में की गई। इसमें न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और संज्ञाहरण विभाग के विशेषज्ञों ने भी अहम भूमिका निभाई। सर्जरी में विशेषज्ञ मार्गदर्शन के लिए गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. हिमांशु चंपारणी को प्रॉक्टर के रूप में आमंत्रित किया गया था।टीम में न्यूरोसर्जरी विभाग से प्रो. अजय चौधरी, न्यूरोलॉजी विभाग से प्रो. ज्योति गर्ग, प्रो. आशीष दुग्गल और डॉ. देवव्रत साहू, रेडियोलॉजी विभाग से प्रो. नम्रता सचदेव तथा संज्ञाहरण विभाग से प्रो. संदीप कुमार और प्रो. संजीव शर्मा शामिल रहे।

दवाओं के असर में उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण
डॉ. शरद पांडे के अनुसार, मरीज को डिस्किनेशिया यानी शरीर की अनियंत्रित गतिविधियों के साथ कंपन, जकड़न और चलने में धीमेपन की समस्या थी। पार्किंसंस के कुछ मरीजों में दवा का असर रहने पर चलना-फिरना आसान हो जाता है, लेकिन असर कम होते ही लक्षण दोबारा बढ़ जाते हैं। इसे आसान शब्दों में ‘ऑन-ऑफ फिनॉमिना’ कहा जाता है। डीबीएस का उद्देश्य उपयुक्त मरीजों में लक्षणों और दवाओं के असर में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करना है। इसके लिए विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद ही मरीज का चयन किया जाता है।

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