दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और दिल्ली जल बोर्ड से एक याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में आरोप है कि सरकारी एजेंसियों से एकत्रित कचरा सेप्टिक टैंक से बिना ट्रीटमेंट ही नजफगढ़ नाले और यमुना नदी में बहा दिया जाता है।
जस्टिस वी कामेश्वर राव, जिन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस याचिका पर सुनवाई की यह स्पष्ट किया कि नजफगढ़ के जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कोई भी कचरा जो इलाके के सेप्टिक टैंक में इकट्ठा होता है किसी भी नाले या इलाके के खुले नालों में न बहने पाए।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 मई निश्चित की है। याचिकाकर्ता योगेश कुमार जो नजफगढ़ के रहने वाले हैं ने कहा कि इस इलाके में कोई सीवर या पानी की लाइन का कनेक्शन नहीं है। इसकी अनुपस्थिति में यहां के निवासियों ने सेप्टिक टैंक बना रखा है।
लोगों के घरों का सीवर का कचरा इस सेप्टिक टैंक में जाता है। इन सेप्टिक टैंकों को या तो लाइसेंस धारी ऑपरेटर साफ कराते हैं या फिर निजी ऑपरेटर। वकील अभिमन्यु महाजन ने कहा कि इन सेप्टिक टैंकों के कचरे को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में साफ होना चाहिए जो नहीं होता। ऐसे में ये सीधे बिना साफ हुए यमुना या बड़े नाले में गिरा दिए जाते हैं। इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि वह निर्देश लेकर एफिडेविट फाइल करेंगे।