हाईकोर्ट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि मौजूदा जनहित याचिका केवल सात सरकारी कॉलोनियों के प्रोजेक्ट तक सीमित है। इसलिए याचिकाकर्ता हर मुद्दे को इस जनहित याचिका का विषय न बनाए। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 30 अगस्त को सात सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास के मामले में यथावत स्थिति बनाए रखने का निर्देश एनबीसीसी को दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण संबंधी एनओसी पर दोबारा विचार नहीं करती, तब तक यथास्थिति बनाई रखी जाए। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए साढ़े 16 हजार पेड़ काटने की अनुमति प्रदान की थी।
दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने एक आवेदन दायर कर कहा था कि ओखला के नजदीक कचरा प्रोसेसिंग प्लांट लगाना है, जिसके लिए 203 पेड़ों को काटना होगा। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के कारण इसकी अनुमति वन विभाग नहीं दे रहा है।
दूसरी ओर, दिल्ली सरकार ने भी अन्य आवेदन दायर कर कहा कि हाईकोर्ट के 4 जुलाई के आदेश के चलते मेट्रो समेत कई जरूरी प्रोजेक्ट रुक गए हैं। वहीं एनएचआई ने अपने आवेदन में कहा था कि कोर्ट के आदेश के कारण मुकरबा चौक से पानीपत के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग एक के चौड़ीकरण का कार्य रुक गया है।