आप विधायक आरोप लगाने वाले शख्स को बुलाने और जिरह के लिए चुनाव आयोग को विवश नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी बृहस्पतिवार को आप विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
चुनाव आयोग ने संसदीय सचिव विवाद मामले में शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल से जिरह की अनुमति से इंकार कर दिया था। इस आदेश को आप विधायकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने कहा कि आप विधायक संसदीय सचिव नियुक्त किये जाने के बाद लाभ के पद पर थे, यह साबित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
विधायक यह नहीं कह सकते कि वह शिकायतकर्ता से जिरह करेंगे। चुनाव आयोग शिकायतकर्ता की शिकायत पर नहीं बल्कि उसके द्वारा पेश किये गये दस्तावेज पर भरोसा कर सुनवाई कर रहा है। आप विधायकों की ओर से तर्क रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने कहा कि विधायकों को पटेल से जिरह करने और गवाहों को बुलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। आप विधायक लाभ के पद पर नहीं थे, यह साबित करने के लिये वह विधानसभा के महासचिव, लेखा एवं प्रशासनिक विभाग के अधिकारियों, विधि मंत्रालय के अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाना चाहते थे।
चुनाव आयोग की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से दस्तावेज पर आधारित है और शिकायतकर्ता द्वारा दिये गए दस्तावेज की सत्यता पर कोई शंका नहीं है।
दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री, विजेंद्र गर्ग विजय, प्रवीण कुमार, शिव चरण गोयल की ओर से एडवोकेट मनीष वशिष्ठ और समीर विशिष्ठ ने यह याचिका दायर की है। विधायकों की मांग है कि हाईकोर्ट चुनाव आयोग 17 जुलाई के आदेश से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज को कोर्ट में मंगवाए। याची विधायकों का दावा है कि उन्हें शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल को तलब करने और उससे जिरह का पूरा अधिकार है।