फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ishrat Jahan Case: इशरत जहां केस की जांच कर रहे आईपीएस अधिकारी को हाईकोर्ट से झटका, केंद्र से मांगा जबाव

Mon, 26 Sep 2022 10:45 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की मदद की थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने निष्कर्ष निकाला कि मुठभेड़ फर्जी थी। 
विज्ञापन
इशरत जहान - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा को उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक महीने पहले सेवा से बर्खास्त करने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वर्मा ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की मदद की थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने निष्कर्ष निकाला कि मुठभेड़ फर्जी थी।

विज्ञापन

अदालत ने इस मामले में वर्मा की याचिका पर नोटिस जारी कर केंद्र को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी और दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले पर फैसला करने के लिए कहा था। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने अब माना है कि इस स्तर पर बर्खास्तगी के आदेश में कोई हस्तक्षेप उचित नहीं है क्योंकि वर्मा को 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होना है। पीठ ने कहा नतीजतन हम इस स्तर पर 30 अगस्त 2022 को बर्खास्त करने के आदेश पर रोक लगाने के लिए इच्छुक नहीं हैं।
विज्ञापन

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता रिट याचिका में सफल होता है तो याचिकाकर्ता अपनी सेवानिवृत्ति नियमों के सभी परिणामी लाभों के लिए हकदार होगा। उच्च न्यायालय ने वर्मा की याचिका पर नोटिस जारी कर केंद्र को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 24 जनवरी को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। मामला 2016 में एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने के लिए वर्मा के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्रवाई से शुरू हुआ है। वह उस समय शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के मुख्य सतर्कता अधिकारी थे। वर्मा ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसने गृह मंत्रालय को उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी थी। इसके बाद वर्मा ने आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें