हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में अध्यापकों के 20 हजार और निगम के स्कूलों में छह हजार पदों का भरने का निर्देश दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में जरूरी कार्यवाई कर सरकार व निगम को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई एक मई को होगी।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कई निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त 10,593 शिक्षकों की भर्ती के लिए डीएसएसएसबी विज्ञापन जारी करे। दूसरे दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में 20 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद सीधी भर्ती से भरने तथा 15 हजार शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करे।
कोर्ट ने कहा कि निगम अपने स्कूलों में शिक्षकों के खाली छह हजार पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करे। कोर्ट ने स्कूलों की पहचान करने और वहां फुटबॉल गोल पोस्ट लगवाने का भी निर्देश दिल्ली सरकार व नगर निगम को दिया है। हाईकोर्ट ने अन्य विभागों में काम पर भेजे 50 प्रधानाचार्यों को एक सप्ताह के भीतर वापस बुलाने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने इन सभी मुद्दों पर सरकार व निगम से एक मई तक जवाब मांगा है।
एनजीओ सोशल जूरिस्ट की अवमानना याचिका पर सुनवाई क्े दौरान हाईकोर्ट ने यह निर्देश जारी किए। याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में 20 हजार पद सीधी भर्ती और 15 हजार पद पदोन्नति से भरे जाने हैं। इसके अलावा, अतिरिक्त शिक्षकों के 10593 पद खाली हैं। इसके लिए डीएसएसएसबी ने प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
निगम के स्कूलो में छह हजार पद खाली हैं। अशोक अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों के 923 पद हैं, जिनमें केवल 126 नियुक्त हैं। स्कूलों में प्रधानाचार्यों के 747 पद खाली हैं। सरकारी स्कूलों के 126 प्रधानाचार्यों में से भी 50 को दिल्ली सरकार ने कोर्ट समेत अन्य विभागों में शिफ्ट किया हुआ है। इससे छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है।