फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाशिमपुरा नरसंहार केसः दिल्ली हाईकोर्ट ने एसएचओ गाजियाबाद के खिलाफ जारी किया गैर जमानती वारंट

Thu, 29 Nov 2018 12:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
हाशिमपुरा नरसंहार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
31 साल पुराने हाशिमपुरा नरसंहार मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए सभी 16 पीएसी जवानों के आत्मसमर्पण न किए जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने गाजियाबाद एसएचओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है।
विज्ञापन


अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि एसएचओ गाजियाबाद अब तक यह रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाए हैं कि क्यों सभी पीएसी जवानों ने सरेंडर नहीं किया। इसके साथ ही अदालत ने एसएसपी गाजियाबाद को भी 5 दिसंबर के दिन तीस हजारी कोर्ट में पेश होने को कहा है। बता दें कि कोर्ट ने सभी दोषियों को 22 नवंबर को आत्मसमर्पण के लिए कहा था लेकिन सिर्फ 4 लोगों ने ही पिछले गुरुवार को तीस हजारी कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।

हाशिमपुरा दंगा मामले में यूपी पीएसी के 4 जवानों ने दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट में किया सरेंडर,कोर्ट ने बाकी बचे 12 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया  है। दोषियों ने स्मिता गर्ग के कोर्ट में सरेंडर किया। सोलह में से चार जवान निरंजन लाल , महेश , समीउल्ला, जैपाल ने सरेंडर किया है। 
विज्ञापन


दिल्ली पुलिस के जवान ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर इन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाशिमपुरा नरसंहार पर सभी सोलह जवानों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसमें से एक की मृत्यु हो चुकी है बाकी पंद्रह में चार ने सरेंडर कर दिया है।
विज्ञापन

क्या है मामला

31 साल बाद मेरठ के हाशिमपुरा नरसंहार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 अक्तूबर बड़ा फैसला सुनाया था। सभी 16 आरोपी पीएसी जवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 1987 के इस मामले में आरोपी पीएसी के 16 जवानों को 42 लोगों की हत्या और अन्य अपराधों के आरोपों से बरी करने के तीन साल पुराने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। 

उत्तर प्रदेश राज्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और नरसंहार में बचे जुल्फिकार नासिर सहित कुछ निजी पक्षों की अपीलों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने छह सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री पी चिदंबरम की कथित भूमिका का पता लगाने के लिए आगे जांच की मांग को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रखा। 28 साल चले मुकदमे में 21 मार्च 2015 को तीस हजारी कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी 16 जवानों को बरी कर दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें