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BMW हिट एंड रन केस: आरोपी को 2 साल की कैद, मृतक के परिजनों को मुआवजा

Sun, 16 Jul 2017 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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BMW hit and run case
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अदालत ने बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में हरियाणा में सोनीपत के व्यवसायी के पुत्र उत्सव भसीन को दो साल कैद की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा मृतक के परिवार को 10 लाख और जख्मी हुए युवक मृग्यांक को दो लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। 
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मामला 2008 में मूलचंद फ्लाईओवर के नजदीक हुए हादसे का है। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी जबकि, दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। सजा सुनाने के बाद अदालत ने भसीन को वैधानिक जमानत दी ताकि वह हाईकोर्ट में अपील दायर कर सके। कोर्ट ने भसीन से 50 हजार रुपये का जमानत मुचलका भरने को कहा। 

साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने उत्सव भसीन (30) को लापरवाही से वाहन चलाने, चोट पहुंचाने व लापरवाही से जान लेने की धाराओं में 26 मई को दोषी करार दिया था। जबकि, गैर इरादतन हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था। अभियोजन के मुताबिक, मूलचंद फ्लाईओवर के पास उत्सव भसीन ने 11 सितंबर, 2008 को कार से बाइक सवार दो युवकों मृग्यांक श्रीवास्तव व अनुज चौहान को पीछे से टक्कर मार दी थी। 
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हादसे में घायल अनुज की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई थी जबकि मृग्यांक को पैर में गंभीर चोट आई थी। हादसे के वक्त उत्सव 21 साल का था और लोधी रोड के आईआईएलएम से बीबीए कर रहा था।  दिल्ली पुलिस ने उसे चंडीगढ़ भागने की कोशिश करते कश्मीरी गेट बस अड्डे से दबोच लिया था। अदालत ने उसे 20-20 हजार के दो जमानती की शर्त पर जमानत दी थी।  
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फैसले पर पीड़ित परिजन नाखुश     

BMW hit and run case
मृग्यांक ने अदालत के फैसले पर नाखुशी जाहिर की। उसने कहा कि पहले अदालत ने आरोपी पर लगे सख्त धाराओं को हटा दिया। अब एक शख्स की मौत व उसकी जिंदगी बर्बाद करने वाले को दो साल की साल सुनाई है।

उसने 17 लाख रुपये अपने इलाज पर खर्च किये हैं और अदालत ने केवल दो लाख रुपये मुआवजा दिया है।  वहीं हादसे में जान गंवाने वाले अनुज के भाई क्षितिज चौहान ने कहा कि अदालत ने सख्त धाराएं हटा ली थीं। वे इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर गैर इरादतन हत्या की धारा लगाने की मांग करेंगे। 

गायों को मारने की सजा
कई राज्यों में गाय को मारने पर पांच, सात और यहां तक कि 14 साल तक की सजा है। लेकिन लापरवाही या तेज गति से गाड़ी चलाकर किसी इंसान की जान लेने पर कानून में केवल दो साल की सजा का ही प्रावधान है।-संजीव कुमार, एडिशनल सेशन जज
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