हरियाणा बोर्ड से संबद्ध प्रदेश के 1,300 निजी स्कूलों के भविष्य का फैसला बुधवार को हो सकता है।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में निजी स्कूलों की ओर से गैर व अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने के विरोध में अपील डाली गई थी।
यह भी पढ़ें:506 स्कूलों की मान्यता रद्द करने का नोटिस
इसे लेकर हरियाणा निजी स्कूल संचालकों में हलचल की स्थिति है। हरियाणा सरकार ने हरियाणा एजुकेशन एक्ट-2003 के नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है।
यह वही स्कूल हैं जो 10 अप्रैल, 2007 के बाद अस्तित्व में आए हैं। सरकार सरकार ने प्रदेश में ऐसे तेरह सौ स्कूलों की पहचान कर उन्हें नोटिस दिया था। इसमें गुड़गांव के सौ स्कूल हैं।
यह भी पढ़ें: मोहाली सहित छह जिलों में बनेंगे रिहायशी स्कूल
इन सभी स्कूलों को सेशन के बीच में ही बंद कराने का निर्णय लिया गया था। इसके खिलाफ निजी स्कूलों की ओर से भोड़सी के यश कुमार राघव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हरियाणा शिक्षण संस्थान संगठन कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष यशपाल यादव ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। कोर्ट का जो भी फैसला होगा उसका सम्मान करेंगे। मगर सरकार को स्कूल बंद नहीं करने देंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से मांग की है कि पॉलिसी बनाकर इन स्कूलों को स्थाई मान्यता प्रदान की जाए। अगर इन स्कूलों को बंद कराने का निर्णय सरकार ने लिया तो प्रदेश व्यापी आंदोलन चलाया जाएगा।
गुड़गांव में 30 हजार विद्यार्थी होंगे प्रभावित
अगर गुड़गांव के गैर और अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूल बंद हुए तो अकेले गुड़गांव के 30 हजार विद्यार्थियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। उन्हें स्कूल बदलना पड़ेगा। वहीं 1500 से अधिक शिक्षक और अन्य स्टॉफ के बेरोजगार होने का भी खतरा मंडरा रहा है। ऑल हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी सतवीर सिंह ने कहा कि सरकार को नीति बनाकर इन स्कूलों को मान्यता दे देनी चाहिए।