दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) बोर्ड में गैरसरकारी सदस्यों की नियुक्ति पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि राजनीतिक नियुक्तियों से बोर्ड की कार्य क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। लिहाजा दिल्ली सरकार की तरफ से नियुक्त तीन गैरसरकारी सदस्यों की बोर्ड में जगह नहीं है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दिल्ली सरकार 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना की बतौर चेयरमैन नियुक्ति की दलील दे रही है, लेकिन यह आधा-अधूरा तथ्य है।
दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर खुराना की नियुक्ति पर एतराज जताया तो उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से कभी गैरसरकारी सदस्य की नियुक्ति बोर्ड में नहीं हुई।
यह एक तरह से नियम बन गया है। पुरी ने कहा कि दिल्ली सरकार किसी सांसद को बोर्ड के लिए नामित नहीं कर रही है। इसकी जगह लोकसभा चुनाव में हारे आप के दो उम्मीदवारों राघव चड्ढा व आतिशी को भेजना चाहती है। तीसरे सदस्य के तौर पर वह एक सांसद के पुत्र नवीन गुप्ता का नाम दे रही है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में गैरसरकारी सदस्यों की कोई जगह नहीं है।
डीएमआरसी नहीं लिस्टेड कंपनी
इस संबंध में केंद्रीय सचिव दुर्गाशंकर मिश्र का कहना है कि लोक निगमों के बोर्ड मे तीन तरह के सदस्य होते हैं। प्रबंध निदेशक के साथ सरकारी सदस्य, केंद्र की तरफ से नामित सदस्य और स्वतंत्र सदस्य। तीसरी तरह के सदस्यों की नियुक्ति लिस्टेड कंपनियों में ही होती है।
डीएमआरसी लिस्टेड कंपनी नहीं है। गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने तीन गैरसरकारी सदस्यों को बोर्ड में नामित करने का प्रस्ताव किया था।
इस पर एतराज जताते हुए केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने 17 जुलाई को दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। इसमें गैरसरकारी सदस्यों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए इन नियुक्तियों को गलत बताया गया था।
1992 की गाइडलाइन मानने की सलाह
इस संबंध में आप के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि 2019 की मोदी सुनामी में भी हरदीप सिंह पुरी अमृतसर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए। ऐसे में हारे हुए उम्मीदवारों की नियुक्ति पर दिए गए बयान पर उनको पुनर्विचार करना चाहिए।
वहीं, दिल्ली सरकार का कहना है कि केंद्र को डीएमआरसी जैसे स्वायत्त संस्थानों के लिए 1992 में बनी गाइडलाइन माननी चाहिए, जिसमें गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाने को कहा गया है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता अजय माकन ने ट्वीट किया कि दिसंबर 2003 में डीएमआरसी के बोर्ड चेयरमैन के पद के साथ संसद से भी मदनलाल खुराना ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनको राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया था।