गांव में की गई थी फिल्म की शूटिंग
कुछ समय पहले एक्शन इंडिया संस्था के लोगों के साथ फिल्म बनाने वाले कुछ लोगों की यूनिट आई। समिति से जुड़ी युवतियों और महिलाओं का कहना है कि उनके लिए फिल्म में काम करना बिल्कुल अनोखा था। गांव के लोग भी आश्चर्यचकित थे। जब पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस नाम की इस डॉक्यूमेंटरी फिल्म की शूटिंग हो रही थी तो किसी को अहसास नहीं था कि इसकी धूम पूरी दुनिया में होगी। उसके बाद इसे ऑस्कर के लिए चुना गया। उसके बाद लोग गांव में आने लगे, जिससे ग्रामीण खुश हैं। एक युवा अंकित का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनके गांव की बेटियों ने सारे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
बहुत कठिन रहा यह सफर
संस्था की जिले की टीम लीडर शबाना का कहना है कि इसका सफर बहुत कठिन रहा है। जब गांव में यूनिट लगाई गई तो कुछ लोगों ने काफी आपत्ति जताई। यह भी कहा गया कि गांव की भोली महिलाओं को बहकाया जा रहा है। कई बार लगा कि किसी और गांव का रूख किया जाए, लेकिन गांव की सुमन के सहयोग से लोगों को मनाया गया। महिलाओं को समझाने के लिए छुप-छुप कर बात की जाती थी। जब फिल्म बनाने वाली यूनिट ने गांव में संपर्क किया तो साल 2017 में 15-15 दिनों के लिए दो बार शूटिंग हुई। विदेशी मूल के लोगों के आने से गांव के लोग आश्चर्यचकित थे। अब जब फिल्म के बारे में इतनी चर्चा हो रही है तो अधिकांश लोग खुश हैं।
गांव से कोई अमेरिका नहीं गया
ऑस्कर समारोह में भाग लेने के लिए सुमन और स्नेह को अमेरिका जाना है। अभी दोनों वीजा आदि की प्रक्रिया में व्यस्त हैं। सुमन इस समिति में समन्वय का काम करती हैं। वह कहती हैं कि इस काम को इतने दिनों में जाकर बड़ी पहचान मिली है। अब इसे दूसरे गांवों तक भी पहुंचाया जा सकेगा।