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साल भर तड़पने के बाद डेढ़ साल के मासूम ने हारी जिंदगी की जंग, इस बीमारी से था पीड़ित

Mon, 19 Nov 2018 05:29 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेढ़ साल के अहसान ने शनिवार रात लोकनायक अस्पताल में दम तोड़ दिया। - फोटो : अमर उजाला
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देश में महंगा इलाज अब बच्चों की जान पर भारी पड़ रहा है। पिछले एक वर्ष से गाउचर (इसमें एंजाइना प्राकृतिक रूप से नहीं बनता) से ग्रस्त दिल्ली के करीब डेढ़ साल के अहसान ने शनिवार रात लोकनायक अस्पताल में दम तोड़ दिया। दिल्ली के ओखला निवासी मकसूद बताते हैं कि उनके बेटे को 4 माह की आयु में एम्स ने गाउचरग्रस्त बताया था। तब से एक वर्ष में करीब 36 लाख 70 हजार रुपये के इंजेक्शन लगने थे। 

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प्रत्येक माह एंजाइना बनाने के लिए उसे दो इंजेक्शन देना जरूरी था। उन्होंने दिल्ली सरकार से लेकर केंद्र तक हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। आखिर उनका बच्चा बीमारी से जंग हार गया। अहसान से पहले शुक्रवार रात भी एक बच्चे की मौत हुई थी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 200 से ज्यादा बच्चे ऐसी बीमारियों से ग्रस्त हैं। ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिसीज इंडिया (ओआरडीआई) के अनुसार, पिछले दो माह में पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से दो दिल्ली निवासी थे। ओआरडीआई के कार्यकारी निदेशक प्रसन्ना शिरोल ने बताया कि दुनियाभर में करीब 7 हजार बीमारियां ऐसी हैं, जो बहुत कम पाई जाती हैं। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इनके भारत में करीब 7 करोड़ मरीज हैं। इनके इलाज का खर्च 30 लाख से डेढ़ करोड़ तक है। कुछ समय पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने नेशनल पॉलिसी फॉर ट्रीटमेंट ऑफ रेयर डिसीज पॉलिसी भी बनाई, लेकिन यह अब तक लागू नहीं हो सकी है। 

इस पॉलिसी के बनने के बाद केंद्र सरकार ने देशभर से आवेदन मांगे। 200 से ज्यादा बच्चों के परिजनों ने मदद के लिए आवेदन दिए। राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र ने 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी रखा था। अब सरकार से मदद न मिलने के कारण ये बच्चे मौत के शिकार हो रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगेगा संगठन

संगठन के अनुसार, 2 माह में जिन सात बच्चों की मौत हुई, उनकी स्थिति गंभीर होने और तत्काल मदद के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी जा चुकी थी। अभी कुछ बच्चे और हैं, जो अस्पतालों में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। अब संगठन ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है।

कई राज्यों में नहीं बनी कमेटी
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि कई विभागों के शामिल होने के कारण योजना में देरी हुई है। अब तक कई राज्यों ने कमेटी तक नहीं बनाई है। पॉलिसी के मुताबिक, इलाज में केंद्र को 60 और राज्य को 40 फीसदी धन खर्च करना है।

दो माह में इन्होंने तोड़ा दम
दो माह के भीतर अहसान के अलावा गुजरात निवासी ईशा, यूपी निवासी फैजल अहमद खान, बिहार निवासी प्रियंका कुमारी, राजस्थान निवासी प्रिंसी, तमिलनाडु निवासी मनीस्वर्ण व केरल निवासी अग्रज गाउचर से दम तोड़ चुके हैं।
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