हलाल सर्टिफिकेट को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आटा, बेसन, सीमेंट व सरिया तक को हलाल प्रमाणन दे रहे हैं। जो हलाल का सेवन नहीं करते, उन्हें ऐसे उत्पादों के लिए अधिक कीमत क्यों चुकानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आटा, बेसन, सीमेंट व सरिया तक को हलाल प्रमाणन दिया जा रहा है। हलाल प्रमाणित उत्पाद महंगे हैं, ऐसे में कोर्ट को इस मुद्दे पर विचार करना पड़ सकता है कि देशभर में लोगों को महंगे हलाल प्रमाणित उत्पाद सिर्फ इसलिए खरीदने पड़ रहे हैं, क्योंकि कुछ लोग उनकी मांग कर रहे हैं। जो हलाल का सेवन नहीं करते, उन्हें ऐसे उत्पादों के लिए अधिक कीमत क्यों चुकानी चाहिए। यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ये दलीलें हलाल प्रमाणित उत्पादों पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए।
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जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ अब 24 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में इस पर सुनवाई करेगी। पीठ ने नोट किया, याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट पहले से ही कोर्ट के पिछले आदेश के आधार पर बलपूर्वक कार्रवाई से सुरक्षित है। पीठ ने केंद्र को हलफनामे की प्रतियां याचिकाकर्ता को देने के लिए कहा और जवाब का समय भी दिया। मेहता ने मांस आधारित उत्पादों के अलावा अन्य उत्पादों हलाल प्रमाणित कर बेचे जाने पर हैरानी जताई। यूपी सरकार ने 18 नवंबर, 2023 को यह प्रतिबंध लगाया था।
यूपी सरकार...बेसन हलाल या गैर हलाल कैसे
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, हलाल मीट पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि आटा, बेसन, सीमेंट, सरिया को भी हलाल प्रमाणित किया जा रहा है। यही नहीं, पानी की बोतलें भी प्रमाणित की जा रही हैं। प्रमाणन एजेंसियां करोड़ों कमा रही हैं। बेसन हलाल या गैर-हलाल कैसे हो सकता है?
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याचिकाकर्ता के वकील एमआर शमशाद ने कहा, केंद्र की नीति में हलाल को विस्तृत रूप से परिभाषित किया गया है। हलाल प्रमाणन सिर्फ मांसाहारी भोजन से संबंधित नहीं है। केंद्र सरकार की नीति खुद कहती है कि यह जीवनशैली का मामला है।